91 हजार करोड़ का IL&FS मामला: पूर्व चेयरमैन हरि शंकरण गिरफ्तार, पूर मामला जानिए

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दिल्ली। IL&FS का कर्ज घोटाला मामले में पहली गिरफ्तारी हुई है. सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) ने पूर्व चेयरमैन हरि शंकरण को गिरफ्तार किया है. मुंबई कोर्ट ने उन्हें 3 दिनों की रिमांड पर दिया है. ताकि मामले में आगे की जांच की जा सके. हरि शंकरण पर आरोप है कि उन्होंने अपने पावर का गलत इस्तेमाल किया.

पावर के गलत इस्तेमाल का आरोप

कंपनी एक्ट के नियमों के तहत IL&FS घोटाला मामले की जांच कर रही मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स अफेयर्स की जांच शाखा के मुताबिक बोर्ड के तत्कालीन हिस्सा रहे शंकरण ने उन कंपनियों को लोन की मंजूरी दी, जो भरोसे के लायक नहीं थी या जिनके कर्ज को एनपीए घोषित कर दिया गया था. इससे कंपनी और उसके कर्जदाताओं को भारी नुकसान हुआ.

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मामले में कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि माल्या, नीरव, चौकसी और संदेसरा से भी बड़ा है IL&FS का कर्ज घोटाला. मोदी सरकार को घेरते हुए कांग्रेस ने कहा था कि कंपनी को भारतीयों के पैसे से बेलआउट कर एक विदेशी कंपनी को मदद पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. IL&FS पर 91 हजार करोड़ का कर्ज है, जो माल्या, नीरव, चौकसी और संदेसरा के घोटाले से कई गुना बड़ा है. हालांकि बाद में दकल देकर सरकार ने कंपनी को बचा लिया.

IL&FS पर 91 हजार करोड़ का कर्ज

इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (IL&FS) कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर, फाइनेंस, ट्रांसपोर्ट और दूसरे कई प्रोजेक्ट पर काम करती है. गड़बड़ियों का पता तब चला जब कंपनी ने कर्ज का ब्याज नहीं चुका पाई. आईएलएंडएफएस पर 91 हजार करोड़ का कर्ज है और उसने जिसे कर्ज दिया है वो लौटा नहीं पा रहे हैं. इसकी वजह से IL&FS ने स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपेंट बैंक ऑफ इंडिया यानी सिडबी के एक हजार करोड़ रुपए के कर्ज का किश्त नहीं चुका पाई.

IL&FS क्या है, किसने बनाया?

1987 में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया और हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी ने इफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को कर्ज देने के मकसद से एक कंपनी बनाई और इसका नाम दिया गया IL&FS (इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज). आईएलएंडएफएस सरकारी क्षेत्र की कंपनी है और इसकी कई सहायक कंपनियां है.

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इसे नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी यानी एनपीएफसी का दर्जा हासिल है. 1992-93 में कंपनी ने जापान की ओरिक्स कॉर्पोरेशन के साथ तकनीकी और वित्तीय साझेदारी के लिए करार दिया. IL&FS में 10 फीसदी हिस्सेदारी ओरिक्स की भी है. 1996-97 में दिल्ली-नोएडा टोल ब्रिज बनाकर IL&FS कंपनी सुर्खियों में आई. इसके बाद से कई प्रोजेक्ट पर कंपनी ने काम किया.

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