निर्भया केस: फांसी पर अगले आदेश तक रोक, जेल में ‘डमी’ पर फांसी का ट्रायल

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nirbhaya case

निर्भया (nirbhaya case) के दोषियों को अब कल फांसी नहीं दी जाएगी। पटियाला हाउस कोर्ट ने अगले आदेश तक फांसी पर रोक लगा दी है। ये दूसरी बार है जब इनकी फांसी टली है। इससे पहले निर्भया के चारों दोषियों को 22 जनवरी को फांसी पर चढ़ाया जाना था।

निर्भया (nirbhaya case) के दोषियों को फांसी पर लटकाया जाना है। इसे लेकर मेरठ जेल से तिहाड़ पहुंचे पवन जल्लाद ने निर्भया के चारों दोषियों के डमी को फांसी लगाकर ट्रायल किया। इस दौरान कैदी के वजन से डेढ़ गुना वजन के पुतलों को लटकाया गया।

तिहाड़ में फांसी का ट्रायल

पवन जल्लाद ने न सिर्फ डमी के जरिए ट्रायल किया बल्कि फांसी में इस्तेमाल होनेवाली रस्सी, तख्ते और लिवर का ट्रायल भी किया। पवन जल्लाद मानते हैं कि निर्भया (nirbhaya case) के गुनहगारों को फांसी देकर उन्हें अच्छा लगेगा। खुद को

पीएम मोदी के बेटी पढ़ाओ- बेटी बचाओ से जोड़ते हुए उन्होंने इसे एक बेहतर कदम माना है।

अगरे आदेश तक फांसी पर रोक

हालांकि पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के तीन दोषियों को मिलनेवाली फांसी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। बता दें कि निर्भया (nirbhaya case) के चारों दोषियों को 1 फरवरी को फांसी दी जानी थी।

दोषी पवन की याचिका खारिज

वैसे जेल प्रशासन अपनी तैयारी पूरी कर चुका है और उसी क्रम में फांसी का ट्रायल भी किया गया। लेकिन फांसी पर अगले आदेश तक रोक के बीच एक और ख़बर आई कि निर्भया के दोषी पवन को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने दोषी पवन गुप्ता की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। पवन ने सुप्रीम कोर्ट के 20 जनवरी के आदेश पर पुनर्विचार याचिका (nirbhaya case) दाखिल की थी जिसमें अपराध के वक्त पवन के नाबालिग होने को खारिज कर दिया गया था। एक बार फिर कोर्ट ने पवन के नाबालिग होने की दलील खारिज कर दी है।

5 घंटे में याचिका खारिज

देश के अपेक्स कोर्ट ने पांच घंटे में ही दोषी पवन की याचिका खारिज कर दी। बता दें कि पवन ने सुबह पौने 11 बजे के करीब सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका (nirbhaya case) दाखिल की थी। इसके बाद रजिस्ट्री ने इसकी सूचना सीजेआई एस ए

बोबड़े को दी। इसके तुरंत बाद इस याचिका को जस्टिस आर बानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस ए एस बोपन्ना के पास विचार के लिए सूचीबद्ध किया गया। और फिर इस पीठ ने चेंबर में विचार किया और याचिका को खारिज कर दिया।​

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