मोदी को बनारस में हराना राहुल का है ‘ख्याली पुलाव’, ये आंकड़ें हैं सबूत

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को लगता है कि अगर 2019 के चुनाव में कांग्रेस, सपा और बसपा मिल जाएं तो प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी से चुनाव नहीं जीत पाएंगे।

राहुल का ‘ख्याली पुलाव’

लेकिन राहुल गांधी के इस दावे की हकीकत तो 2019 में ही पता चलेगा।

उससे पहले 2014 के लोकसभा और 2017 में हुए विधानसभा चुनावों के आकंड़े देख लेते हैं।

इन आंकड़ों को देखने से पता चलता है कि सारा विपक्ष एकजुट होकर भी मोदी को मात यहां से नहीं दे सकता है।

दरअसल, 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी वाराणसी को अपना कर्मभूमि बनाया,

यहां के लोगों ने भी मोदी को दिल से स्वीकार किया। 2014 के लोकसभा चुनाव में 10 लाख 30 हजार 685 मतदाताओं ने मतदान किया,

जो कि 2009 के चुनाव की तुलना में 15 फीसदी ज्यादा वोट है।

वोटों का अंतर ज्यादा

इस चुनाव में मोदी को पांच लाख 81 हजार 22 वोट मिले, जो कि कुल वोट का 56 फीसदी हिस्सा है।

जबकि आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल को दो लाख 9 हजार 238 वोट मिले।

कांग्रेस उम्मीदवार अजय राय को 75 हजार 614 वोट मिले। बसपा के विजय प्रकाश जयसवाल को

60 हजार 579 और सपा के कैलाश चौरसिया को 45 हजार 291 वोट मिले और टीएमसी की

इंदिरा तिवारी को 2674 वोट मिले। यानि की मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाली सभी विपक्षी दलों को

कुल मिलाकर तीन लाख 93 हजार 396 वोट मिले। इसके बावजूद मोदी का कुल वोट एक लाख 87 हजार 626 अधिक है।

इसके साथ ही वाराणसी में पांच विधानसभा सीटें भी आती हैं।

2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व सपा ने मिलकर चुनाव लड़ा था।

रोहनियां सीट से बीजेपी उम्मीदवार सुरेंद्र नारायण सिंह को 1,19,585 वोट मिले थे।

जबकि सपा को 62 हजार 332 और बसपा को 30 हजार 531 वोट मिले। दोनों पार्टियों का वोट मिला दें तो बीजेपी से काफी कम है।

वहीं, उत्तर वाराणसी सीट से बीजेपी को एक लाख 16 हजार 17 वोट मिले।

तो कांग्रेस को 70 हजार 515 और बसपा को 32 हजार 874 वोट मिले।

दोनों को मिला दें तो बीजेपी से ये काफी कम वोट हैं।

इसके साथ ही वाराणसी दक्षिण सीट पर भी बीजेपी को 92 हजार 560 वोट मिले थे।

वहीं कांग्रेस को 75 हजार 334 और बसपा को पांच हजार 922 वोट मिले।

वोटों का समीकरण

इसके साथ ही मुस्लिम बहुल इलाके वाराणसी कैंट का भी ऐसा ही हाल रहा।

यहां बीजेपी उम्मीदवार को 1लाख 32 हजार 609 वोट मिले।

जबकि कांग्रेस को 71 हजार 283 और बसपा को 14 हजार 118 वोट मिले।

वहीं, शिवपुरी सीट बीजेपी ने अपने सहयोगी दल को दिया था।

इस सीट से अपना दल को एक लाख 3 हजार 423 वोट मिले थे।

वहीं, सपा को 54 हजार 241 और बसपा को 35 हजार 657 वोट मिले थे।

ऐसे में वाराणसी के पांचों विधानसभा सीटों के नतीजे को मिला दें तो

बीजेपी उम्मीदवार को पचास फीसदी से ज्यादा वोट मिले।

ऐसे में राहुल गांधी का यह बात एक ख्याली पुलाव ही लगता है।

हालांकि इस बात में कितना दम है इसके लिए 2019 का इंतजार करना होगा।

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