बिहार: 1 पैग के लिए पहली बार देने होंगे 50 हजार, दूसरी बार 1 लाख और 5 साल की जेल

बिहार: 1 पैग के लिए पहली बार देने होंगे 50 हजार, दूसरी बार 1 लाख और 5 साल की जेल

पटना। बिहार में जिस शराबबंदी कानून की चर्चा देश-दुनिया के कोने-कोने में होती थी उसे अब ‘लचीला’ बना दिया गया. यानी अगर आप बिहार में हैं और ‘गलती’ से ड्रिंक का मजा लेते पकड़े गए तो 50 हजार रुपए फाइन लगेगा. ये खुल्लमखुला होगा. वैसे आप चाहें तो कम में भी पटिया सकते हैं. दुनिया के हर कोने की तरह यहां भी ‘ऑप्शन’ खुला ही रहेगा! मगर दूसरी बार झूमते हुए पकड़े गए तो फिर खैर नहीं. फाइन 1 लाख और जेल 5 साल.

शराबबंदी कानून में संशोधन

मॉनसून सत्र के दूसरे दिन शराबबंदी कानून बहुमत से पारित हो गया. इसमें कई प्रावधानों में ‘नरमी’ बरती गई है. सदन में नीतीश कुमार ने बताया कि निर्दोषों को बचाने के मकसद से संशोधन लाया गया है. उन्होंने कहा कि इस कानून के गलत इस्तेमाल को रोकने पर सरकार का जोर है. संशोधन का मतलब ये नहीं है कि पीने वाले बख्शे जाएंगे, शराब पीकर उपद्रव करने पर कड़ी कार्रवाई होगी.

बिहार शराबबंदी कानून के नए नियम

  • पहली बार शराब पीकर पकड़े जाने पर 50 हजार का जुर्माना या तीन साल की जेल.
  • पहली बार शराब पीने वाले अगर जुर्माना भर देंगे तो जेल नहीं जाना पड़ेगा.
  • दूसरी बार पकड़े गए तो एक लाख जुर्माना और पांच साल की जेल की सजा.
  • किसी गांव में शराब बनाने और पीने पिलाने वालों पर अब सामूहिक जुर्माना नहीं लगेगा.
  • किसी गाड़ी या मकान में शराब पीने या रखने पर उस घर को सील नहीं किया जाएगा.
  • परिवार के सभी बालिग पर यह कानून लागू नहीं होगा. सिर्फ जिसने शराब पी है उसके खिलाफ कार्रवाई होगी.
  • पुराने शराबबंदी कानून के 17 प्रावधानों में परिवर्तन किए गए. कुछ को तो हटा दिया गया.
  • शराब पी कर उपद्रव, हंगामा और मारपीट करने की सजा में कोई बदलाव नहीं किया गया.

‘संशोधन के नाम पर अमीरों को डिस्काउंट’

मगर कभी नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम रहे और शराबबंदी कानून लागू करानेवाले तेजस्वी यादव को ये संशोधन रास नहीं आया. उन्होंने कहा कि सरकार ने संशोधन के नाम पर अमीरों को डिस्काउंट दे दिया. अमीर लोग 50 हजार रुपए जुर्माना देने की बजाय 5 हजार रुपए में शराब हासिल कर लेंगे. तेजस्वी यादव ने सवाल पूछा कि आखिर बिहार में शराब आती कहां से हैं?

बिहार में पिछले 2 साल से शराबबंदी कानून लागू है. विपक्ष के नेताओं का आरोप था कि शराबबंदी के नाम पर दलितों और पिछड़ों को गिरफ्तार किया जा रहा है. इसके बाद ही सरकार ने कानून में संशोधन के संकेत दिए थे. सियासी गलियारे में ये भी माना जा रहा है कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर ये संशोधन किए गए हैं. कठोर कानून की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी गरीब तबके के लोगों को होती थी. उनके घर का कमानेवाला शराब की चक्कर में महीनों जेल में रहता था फिर उनके घर की माली हालत बिगड़ जाती थी.

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