गांधी जी प्रभावित होकर इस डॉन ने जज के सामने कबूल कर लिया था गुनाह

गांधी जी प्रभावित होकर इस डॉन ने जज के सामने कबूल कर लिया था गुनाह

दिल्ली। गांधी जी लोगों से हमेशा सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए कहते थे। उन्होंने कहा था कि विचार ही व्यक्ति के निर्माता हैं और व्यक्ति जैसा सोचता है, वैसा ही बन जाता है। गांधी जी की यह बात मोटिवेशनल और गांधी विचारक लक्ष्मण गोले पर बिल्कुल सटीक बैठती है। कैसे गांधी जी के विचारों को अपने अंदर उतारकर अपनी पूरी जिंदगी में बदलाव लाया। जिससे प्रभावित होकर जज ने भी उनकी सजा कम कर दी थी। आइए आपको विस्तार से लक्ष्मण गोले की पूरी कहानी बताते हैं।

लक्ष्मण गोले की पूरी कहानी

लक्ष्मण गोले मोटिवेशनल गुरु से पहले एक कुख्यात गैंगस्टर थे। दस सालों तक वे महाराष्ट्र के अलग-अलग जेलों में रहे। उनके ऊपर लूटपाट, अपहरण, गैंगवार जैसे तमाम संगीन आरोप थे। मगर अब लक्ष्मण गोले की पूरी कहानी बदल गई है। महात्मा गांधी की ‘माई एक्सपेरिमेंट्स विथ ट्रुथ’ किताब को पढ़ उनकी सोच ही नहीं, उनकी जिंदगी बदल गई। आज वो जुर्म की उस काली दुनिया को छोड़ काफी आगे निकल चुके हैं। अब वे देश के अलग-अलग जेलों में जाते हैं, लेकिन अपराधी के तौर पर नहीं मोटिवेशनल गुरु के तौर पर जाते हैं। कैदियों की सोच बदलने का लगातार प्रयास करते हैं।

लड़की को बचाने के लिए पहली गुनाह

मुंबई के रहने वाले लक्ष्मण गोले ने महज सातवीं तक की ही पढ़ाई की है। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह है कि जब वे स्कूल जाते थे तो रास्ते में उन्हें नशा, गैंगवार और कई तरह के गैरकानूनी काम करने वाले लोगों से उनका सामना होता था। ऐसी चीजों को देख उन्हें काफी बुरा लगता था। एक दिन स्कूल की एक लड़की को कुछ गुंडे छेड़ रहे थे। गोले वहां से गुजर रहे थे लेकिन किसी ने गुंडों को रोकने की कोशिश नहीं की। यहीं से लक्ष्मण गोले की पूरी कहानी बदल गई। फिर गोले ने उन गुंडों को समझाने की कोशिश की लेकिन वे नहीं माने। इसी दौरान गोले पास के एक सैलून से उस्तरा लाए और बदमाश को घायल कर दिया।

…जुर्म की दुनिया में आए गोले

उसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने कोर्ट में 16 साल के गोले को 18 साल का बताया। इस वजह से उन्हें जेल जाना पड़ा। जेल के अंदर उनकी मुलाकात कई गैंगस्टर और अंडरवर्ल्ड के लोगों से हुआ। उसके बाद उन्होंने वहां अंडरवर्ल्ड के बारे में विस्तार से समझा। उसके बाद वे अंडरवर्ल्ड के साथ जुड़ गए। यहीं से लक्ष्मण गोले की पूरी कहानी बदल गई. एक इंटरव्यू के दौरान लक्ष्मण गोले ने बताया था कि जब वे जेल से बाहर निकले तो लोगों का उनके प्रति नजरिया बिल्कुल बदल गया था। लोग उनसे बात करना पसंद नहीं करते थे। गोले ने कहा कि लोग मुझे अपराधी समझते थे जबकि मैंने किसी की इज्जत बचाने के लिए इतना बड़ा कदम उठाया था। इस रह जब कोई मुझे अपनाने के लिए तैयार नहीं हुआ तो मैं भी गैंगस्टर के साथ मिलकर अपराध की दुनिया में आ गया।

गांधीवादी संगठन ने बदली जिंदगी

12 साल तक करीब अपराध की दुनिया में रहने के बाद लक्ष्मण गोले को पुलिस ने 2004 में फिर पकड़ा। इस बार उन्हें पुणे के यरवदा जेल में रखा गया। यहां पर उन्होंने धीरे-धीरे किताबें और उपन्यास पढ़ने की आदत लगी। जेल में इसी दौरान गांधीवादी संगठन मुंबई सर्वोदय मंडल के सदस्य कैदियों के बीच गांधी जी और विनोबा भावे के नैतिक मूल्यों को बताने के लिए आए थे। लक्ष्मण गोले ने भी उस सेशन में हिस्सा लिया। यही से एक बार फिर लक्ष्मण गोले की पूरी कहानी बदल गई.

सर्वोदय मंडल से प्रभावित होकर लक्ष्मण गोले ने महात्मा गांधी की आत्मकथा माई एक्सपेरिमेंट्स विथ ट्रुथ को पढ़ा। इसे पढ़ने के बाद उनकी जिंदगी वाकई बदल गई। लक्ष्मण गोले ने एक वेबसाइट्स से बात करते हुए कहा कि मुझे इस किताब को पढ़ने के बाद अहिंसा और सच्चाई की ताकत अहसास हुआ। मैंने फैसला किया कि इसमें लिखी बातों को मैं अपने अंदर लागू करूंगा। इसके बाद मैंने जज के सामने आपने गुनाह कबूल कर लिया। मैंने सोचा कि इससे मुझे ज्यादा से ज्यादा से 7 साल और सजा मिलेगी। लेकिन इस कबूलनामे से मेरा मन शुद्ध हो जाएगा।

2010 में नंदा गोले से शादी

जज ने भी लक्ष्मण गोले की भावनाओं का सम्मान किया और 7 साल की सजा को 4 साल 2 महीने में बदल दिया। इस तरह से वे 2008 में जेल से बाहर आ गए। उसके बाद वे बिल्कुल बदल गए और जेल में रहते हुए दूसरे कैदियों के बीच वे गांधी जी का संदेश पहुंचाने का काम करते थे। इस दौरान उनकी पहचान कैदी नहीं मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में होने लगी थी। और फिर यहीं से एक बार फिर लक्ष्मण गोले की पूरी कहानी बदल गई. इस तरह से जब 2010 में उनकी मुलाकात अपनी होने वाली पत्नी नंदा गोले से हुई तो उन्होंने उनसे भी कुछ नहीं छिपाया और अपना कच्चा चिट्ठा उनके सामने खोलकर रख दिया। नंदा गोले उनकी इस सच्चाई से प्रभावित होकर शांदी के लिए तुरंत तैयार हो गई।

उसके बाद वे लोगों को सुधारने की कवायद में जुट गए। इसी का नतीजा रहा कि 13 कैदियों ने जज के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया। इन लोगों ने भी सत्य और अहिंसा की राह पर चलने का फैसला लिया है। लक्ष्मण गोले की दो बेटियां सत्या और सौम्य है। लक्ष्मण कई लाइब्रेरी और आम लोगों के बीच महात्मा गांधी और विनोबा भावे से जुड़ा साहित्य बांटने का काम करते हैं।

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