उत्तर भारत में आंधी-तूफान तो दक्षिण भारत में सियासी बवंडर, नया ठिकाना हैदराबाद

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बेंगलुरु। उत्तर भारत में आंधी-तूफान तो दक्षिण भारत में सियासी बंवडर से कोहराम मचा हुआ है. कर्नाटक में बीजेपी ने सरकार तो बना ली, मगर संख्या बल जुटाने में पसीने छूट रहे हैं. जब से रिजल्ट आया तब से राजनीतिक आंधी-तूफान है.

एक-एक विधायक का रोल अहम हो गया है. सियासी पार्टियां अपने-अपने टॉप मैनेजर्स लगा रखे हैं.

येदियुरप्पा के शपथ लेने के 12 घंटे बाद की कांग्रेस के लिए कर्नाटक ‘महफूज’ नहीं रह गया.

आनन-फानन में बेंगलुरू को खाली करना पड़ा.

कांग्रेसी विधायकों का नया ठिकाना हैदराबाद

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बेंगलुरु का ईगलटन रिजॉर्ट कांग्रेसी विधायकों के लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं रह गया.

या यूं कहें कि पूरा कर्नाटक ही इनके लिए महफूज नहीं रहा.

कांग्रेस विधायकों का नया ठिकाना हैदराबाद में तय किया गया.

हालांकि इतने किलेबंदी के बावजूद कांग्रेस के दो विधायक अब भी ‘लापता’ हैं.

इनमें नाम है- राजशेखर पाटिल और प्रताप गौड़. ये दोनों पार्टी के संपर्क में नहीं हैं.

वहीं कांग्रेस का दावा है कि मैसूर के कुछ बीजेपी विधायक उनके संपर्क में हैं.

कुमारास्वामी ने भी कर रखी है घेराबंदी

समस्या सिर्फ कांग्रेसियों के लिए नहीं है, जेडीएस वालों ने भी घेराबंदी कर रखी है.

जेडीएस के विधायक भी नए ठिकाने की तलाश में निकल चुके हैं.

इनमें कुछ का कोच्चि तो, कुछ का हैदराबाद में बसेरा है.

‘पॉलिटिकिल टॉप मैनेजर्स’ का अहम रोल

कांग्रेस के तरफ से सीनियर नेता गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत डेरा डाले हुए हैं.

तो कुमारस्वामी ने भी घेराबंदी कर रखी है. इन तीनों नेताओं की रिजॉर्ट में लंबी मीटिंग हुई.

पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया भी बैठक में मौजूद रहे. इनको उम्मीद है कि बहुमत साबित करने के समय को कोर्ट घटा देगा.

वहीं कांग्रेसी विधायकों ने दावा किया उनको धमकी भरे कॉल आ रहे हैं.

उनकी पुलिस सुरक्षा वापस ले ली गई है. कहीं जाने के लिए फ्लाइट परमिशन भी नहीं दिया जा रहा है.

इनका ये भी आरोप है कि सरकार बनने के बाद कुछ बीजेपी नेता उनके रिजॉर्ट में घुस आए.

यही वजह है कि रिजॉर्ट को खाली करना पड़ा.

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