कर्नाटक के बाद दिल्ली में ‘फंसेगी’ मोदी की सरकार, जानिए कैसे

कर्नाटक के बाद दिल्ली में 'फंसेगी' मोदी की सरकार, जानिए कैसे

दिल्ली। कर्नाटक में फ्लोर टेस्ट देने से पहले सीएम येदियुरप्पा ने इस्तीफा दे दिया था। क्योंकि बीजेपी बहुमत का जुगाड़ नहीं कर पाई थी। लेकिन कर्नाटक के बाद अब केंद्र में भी बीजेपी के सामने कुछ ऐसी ही स्थिति सामने आने वाली है।

बीजेपी के 2 सांसद बन गए विधायक

दरअसल, कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बीजेपी के दो सांसद विधानसभा का चुनाव लड़े और जीत गए। इनके नाम हैं बीएस येदियुरप्पा और बी. श्रीरामुलु।

जीतने के बाद दोनों सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया है और विधायक पद की शपथ ली है। येदियुरप्पा शिमोगा सीट, तो श्रीरामुलु बेल्लारी से सांसद थे।

लोकसभा अध्यक्ष के पास दोनों ने इस्तीफा भेज दिया है। वो 14 दिनों में इस पर फैसला लेंगे। अगर वो इन दोनों का इस्तीफा स्वीकार करती हैं तो बीजेपी सदन में बहुमत के आंकड़े से नीचे आ जाएगी।

इनका इस्तीफा स्वीकार होते ही भाजपा के लोकसभा सांसदों की संख्या बहुमत से कम हो जाएगी। भाजपा ने 2014 के चुनावों में अकेल 282 सीटें जीती थीं।

उसके बाद से बीजेपी के आठ सांसदों का निधन हो चुका है। इनमें से छह सीटों पर उपचुनाव हो चुके हैं और दो पर 28 मई को होने हैं।

इन छह सीटों में बीड़, शहड़ोल पर बीजेपी, रतलाम, गुरुदासपुर, अजमेर, अलवर सीटों पर कांग्रेस जीती। इसके साथ ही कैराना और पालघर में अभी उपचुनाव होने हैं।

वहीं, 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी ने दो लोकसभा सीटों बडोदरा और बनारस से चुनाव लड़ा था। दोनों पर जीत के बाद उन्होंने वडोदरा सीट से इस्तीफा दे दिया था। इस सीट पर उपचुनाव में बीजेपी ने जीत दर्ज की।

इसके अलावा यूपी में सरकार बनाने पर सांसद योगी आदित्यनाश और फूलपुर सांसद केशव प्रसाद मौर्या ने इस्तीफा दे दिया था। लेकिन उपचुनाव में दोनों सीटों पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की।

इसके अलावा महाराष्ट्र के भंडरा-गोदिया से भाजपा सांसद नाना पटोले ने पद से इस्तीफा देकर पार्टी छोड़ी थी। इस सीट पर अभी उपचुनाव होने बाकी हैं।

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बहुमत से 1 सीट पीछे हो जाएगी मोदी सरकार

इसके बाद बीजेपी के पास स्पीकर के मिलाकर कुल 269 सांसद बचेंगे तो फिलहाल 271 हैं। अभी तीन सीटें खाली हैं। मतलब अभी लोकसभा में 541 सीटें हैं।

और भाजपा बहुमत की स्थिति मतलब आधे से एक ज्यादा है। अगर इन दोनों का इस्तीफा स्वीकार होता है तो सदन की संख्या 539 होगी और भाजपा की संख्या 269 हो जाएगी। जो बहुमत की स्थिति, मतलब कि 269+1 से कम होगी।

इसके साथ ही बीजेपी के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, सावित्री बाई फुले, राजकुमार सैनी पूरी तरह से बागी रुख अपनाए हुए हैं।

कुछ दिन पहले पांच दलित सांसदों ने पीएम मोदी को पत्र लिख दलितों के प्रति बीजेपी सरकार की नीतियों पर नाखुशी जताई थी।

फिलहाल एनडीए के पास लोकसभा में पूर्ण बहुमत है। अगर बीजेपी उपचुनावों में नहीं जीता पाती है और उनके इस्तीफे स्वीकार हो जाते हैं तो वो खुद बहुमत के आंकड़े से नीचे रह जाएगी।

फिर किसी भी बिल को लोकसभा से पास कराने के लिए उसे सहयोगी पार्टियों पर निर्भर करना पड़ेगा। सहयोगियों में से टीडीपी और टीआरएस पहले एनडीए सरकार का साथ छोड़ चुके हैं। एनडीए में फिलहाल शिवसेना भी बागी बनी हुई है।

ऐसे में बीजेपी को फिर से पूर्ण बहुमत की स्थिति में पहुंचने के लिए सभी उपचुनाव जीतने होंगे। या इन दोनों के इस्तीफे पर स्पीकर को भाजपा के पक्ष में फैसला लेना होगा।

नहीं तो किसी भी बिल या अविश्वास प्रस्ताव आने की स्थिति में पूरी तरह सहयोगी दलों पर ही निर्भर रहना होगा।

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