जब नीतीश कुमार ने दिया तेजप्रताप और ऐश्वर्या को गुलदस्ता, फिर क्या हुआ…

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पटना। बिहार के सबसे बड़े सियासी परिवार में शादी चल रही है. लालू प्रसाद के बेटे तेजप्रताप और ऐश्वर्या राय अटूट बंधन में बंध रहे हैं. शाही शादी में इस बात का पूरा ख्याल रखा जा रहा है किसी तरह की कोई कमी न रह जाए.

10 सर्कुलर रोड राबड़ी आवास से तेजप्रताप की बारात वेटनरी कॉलेज ग्राउंड पहुंची.

द्वार पूजा के बाद तेजप्रताप और ऐश्वर्या ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई. बड़ों का आशीर्वाद लिया.

आशीर्वाद देनेवालों में नीतीश कुमार

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तमाम ‘बड़ों’ के साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी आशीर्वाद देनेवालों में शामिल हुए.

बिहार की शाही शादी और सिायसत की ये तस्वीर बड़ा ही दिलचस्प थी.

नीतीश कुमार तेजप्रताप और ऐश्वर्या को गुलदस्ता दिया. दोनों को शादी की शुभकामनाएं दी.

तेजप्रताप के कंधे पर हाथ रखा. तेजप्रताप के चेहरे पर मुस्कुराहट थी.

ये तस्वीर इसलिए भी बेहद खास हो जाती है कि क्यों जबसे नीतीश कुमार ने लालू का साथ छोड़कर बीजेपी का हाथ थामा,

तब से ही जबर्दस्त तल्खी देखने को मिल रही थी.

मगर नेताओं का सियासी संबंध और पर्सनल रिलेशन बिल्कुल अलग होते हैं.

सब एक-दूसरे के फंक्शन में शामिल होते हैं. हंसी-मजाक करते हैं.

मगर जब कैमरे पर होते हैं तो एक-दूसरे के खिलाफ आग उगलते रहते हैं.

जब लालू ने थामा नीतीश का हाथ

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ऐसी तस्वीर पटना के वेटनरी कॉलेज में देखने को मिली

जब लालू प्रसाद और नीतीश कुमार ने एक-दूसरे का हाथ थामा

और मुस्कुराते हुए तस्वीरें खिंचवाई. ऐसा लग रहा था मानो दोनों के बीच कोई गिला-शिकवा था ही नहीं.

दरअसल नीतीश कुमार और लालू प्रसाद स्टूडेंट लाइफ के फ्रेंड हैं.

ऐसी सियासी तल्खी उन्होंने अपने करियर में कई बार झेला है.

‘चच्चा’ के बगल में बैठे तेजस्वी

और तो और ट्विटर और टीवी पर नीतीश कुमार के खिलाफ आग उगलनेवाले तेजस्वी भी ‘चच्चा’ के बगल में बैठे थे.

दोनों ने मुस्करा कर एक-दूसरे का हाल-चाल जाना. जब बैठने की बारी आई तो राज्यपाल के बगल में नीतीश कुमार बैठे.

नीतीश कुमार के बगल में तेजस्वी यादव और फिर उनके बगल में लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी बैठी थीं.

तस्वीर को देखकर कैसा लग रहा था मानो जो पिछले 6-8 महीने की सियासी दुश्मनी को

नीतीश कुमार और लालू परिवार भूल चुका है. मगर सियासत इसी नाम है.

तस्वीरों में अभी पर्सनल रिलेशन दिख रहा है.

कल जैसे ही बात सियासत और अपने-अपने वोटबैंक की आएगी

एक बार फिर से दोनों एक-दूसरे के लिए सियासी दुश्मन बन जाएंगे.

शायद सियासत इसी भूल-भुलैया नाम है. इसमें और भूले या न भूले,

जनता इस भूल-भुलैया में जरुर खो जाती है.

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