पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनकर कोई क्या हासिल कर लेगा? इतिहास जानिए…

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जेल में नवाज-मरियम

जेल में नवाज-मरियम

दिल्ली। पाकिस्तान का प्रधानमंत्री (वजीर-ए-आजम) कोई क्यों बनना चाहेगा? कभी सोच कर देखिएगा. आपको सच का सामना हो जाएगा. एक बर्बाद मुल्क, जो दुनिया में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए बदनाम हो. जिसकी आर्थिक हालात दिवालिया होने की कगार पर हो.

विदेशी मदद न मिले तो पता नहीं पाकिस्तान कब बर्बाद मुल्कों की कैटेगरी में आ जाए. जो अमेरिका के बाद चीन पर डिपेंड हो गया हो. अपनी जमीन दूसरे मुल्कों को किराए पर देता हो. नागरिक सुविधाए चौपट हो. वहां कोई सत्ता क्यों संभालना चाहेगा?

जेल में नवाज-मरियम

पाकिस्तान का इतिहास ही खून से रंगा हुआ है. सियासी रंजिश में यहां कुर्सी के लिए तख्तापलट से लेकर फांसी और हत्या तक होती है.
प्रधानमंत्री को जेल होना यहां सबसे राहत की बात है. मियां नवाज शरीफ खुशनसीब हैं कि उन्हें देश निकाला और जेल तक झेलने पड़े. कम से कम उनकी जान तो अब तक बची है. अपनी बात कहने का उनके पास हक बचा है. अपनी बेटी मरियम के साथ रावलपिंडी के अडियाला जेल में रात तो गुजार सकते हैं. उनके बारे में सोचिए जिन्हें उनके सियासी दुश्मन ने जिंदा रहने का हक भी छीन लिया. वो भी कहते थे कि वो मुल्क की बेहतरी के लिए सब कर रहे हैं. मियां नवाज शरीफ भी कह रहे हैं कि वो अपने देश की भलाई के लिए जेल जाने को तैयार हैं. शुक्र है, कम से कम जिंदगी के मामले में खुशनसीब हैं.

लियाकत अली खान

नवाबजादा लियाकत अली खान पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने पाकिस्तान आंदोलन के दौरान मुहम्मद अली जिन्ना के साथ कई दौरे किए. संयुक्त भारत के पहले वाणिज्य मंत्री भी थे. 1951 में उनका कत्ल कर दिया गया. अब तक गुत्थी नहीं सुलझी है.

जुल्फिकार अली भुट्टो

1973-1977 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे जुल्फिकार अली भुट्टो, जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अपने मुल्क को परमाणु ढांचा तैयार करने वाली नीति दी. जो भारत को फूटी आंख नहीं देखना चाहते थे, उनको पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 1979 में फांसी पर लटका दिया गया. इसकी साजिश करनेवालों में सैन्य शासक जिया उल हक का नाम शामिल रहा. उनकी बेटी बेनजीर भुट्टो आगे चल कर पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनीं.

मुहम्मद जिया उल हक

जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी पर लटकानेवाले जनरल मुहम्मद जिया उल हक एक हवाई जहाज दुर्घटना में मारे गए. इसके पीछे साजिश की बात कही गई. मगर जांच में अब तक कुछ भी पता नहीं चला. आज भी फाइलें जस की तस पड़ी हुई हैं. जुल्फिकार अली भुट्टो का तख्तापलट कर इन्होंने राजकाज पर कब्जा किया था. इनके शासनकाल में पाकिस्तान का इस्लामीकरण हुआ. बाद में उग्रवाद और आतंकवाद में तब्दील हो गया.

बेनजीर भुट्टो

पाकिस्तान की सत्ता पर दो बार काबिज रहीं बेनजीर भुट्टो तीसरी बार सत्ता की चाबी खोज रही थीं. मगर रावलपिंडी में एक राजनैतिक रैली के बाद आत्मघाती बम और गोलीबारी के डबल अटैक कर उनकी हत्या कर दी गई. पूरब की बेटी के नाम से जानी जानेवाली बेनजीर किसी भी मुस्लिम देश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं. हत्या के बाद सबूत को इतनी जल्दी मिटा दिया गया कि आजतक कातिल का पता ही नहीं चला.

नवाज शरीफ

पाकिस्तान के औद्योगिक घराने में पैदा हुए मियां नवाज शरीफ तीन बार पाकिस्तान की सत्ता संभाल चुके हैं. परवेज मुशर्रफ ने तख्तापलट कर पहले तो उन्हें जेल में डाला, बाद में देश निकाला दे दिया. कम से कम उनकी जान बख्श दी. किसी तरह बाद में पाकिस्तान लौटे. सत्ता पर काबिज हुए. मगर 2016 में पनामा पेपर लीक मामले में उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे. 28 जुलाई 2017 को उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी. अब उन्हें 10 साल की और उनकी बेटी को सात साल की सजा सुनाई गई. वो एक बार फिर जेल में हैं.

परवेज मुशर्रफ

नवाज शरीफ को सत्ता से बेदखल करनेवाले जनरल परवेज मुशर्रफ राष्ट्रपति और सेना प्रमुख रह चुके हैं. कुर्सी से हटते ही उन्हें देश निकाला दे दिया है. वापस लौटने पर नजरबंद कर दिया गया. अक्सर वो दूसरे मुल्कों में पनाह लिए रहते हैं. मुशर्रफ के शासनकाल में हिन्दुस्तान में आतंकवादी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई. 2005 में परेड मैगजीन ने मुशर्रफ को दुनिया के 10 बुरे तानाशाहों की सूची में शामिल किया.

यूसुफ रजा गिलानी

यूसुफ रजा गिलानी खुशनसीब रहे कि पाकिस्तान के सबसे लंबी अवधि तक पद पर बने रहनेवाले निर्वाचित प्रधानमंत्री का रिकॉर्ड अपने नाम किया. पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने 26 अप्रैल 2012 को उन्हें पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले को फिर से खोलने के लिए स्विस अधिकारियों को पत्र लिखने के आदेश का पालन न करने के कारण अवमानना का दोषी करार दिया. 19 जून को सुप्रीम कोर्ट ने दूसरा आदेश जारी करते हुए उन्हें पद पर बने रहने के लिए अयोग्य करार दिया. इसके बाद हुए चुनावों में मियां नवाज शरीफ सत्ता पर काबिज हुए, मगर कुर्सी उनके पास भी नहीं रही.

इमरान पर नजर

पाकिस्तान के सियासी हालात पर गौर करने पर पता चलता है कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी की जनता पर पकड़ नहीं है. शाहबाज शरीफ, नवाज शरीफ की छाया से कभी बाहर निकल ही नहीं पाए. शाहिद खकान अब्बासी ने कभी खुद को प्रधानमंत्री माना ही नहीं. अब नजर सिर्फ इमरान खान पर टिकती है. पाकिस्तान की जनता आज भी इमरान खान पर भरोसा दिखाती है. इमरान को पाकिस्तान की सेना भी पसंद करती है. आईएसआई को इमरान पर कोई ऐतराज नहीं है. कट्टरपंथियों को लेकर इमरान खान ने कभी सख्त रवैया अपनाया नहीं. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है पाकिस्तान का अगला वजीर-ए-आजम बनने की रेस में कौन सबसे तेज दौड़ रहा है. मगर सवाल वहीं है कि आखिर पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनकर कोई क्या हासिल कर लेगा?