देश के 131 सांसदों और 1100 विधायकों को ‘रावण’ का अल्टीमेटम

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देश के 131 सांसदों और 1100 विधायकों को 'रावण' का अल्टीमेटम

देश के 131 सांसदों और 1100 विधायकों को 'रावण' का अल्टीमेटम

दिल्ली। देश के ‘दलित’ विधायकों-सांसदों को ‘रावण’ का अल्टीमेटम मिल गया है. अगर काम नहीं करेंगे तो पोल खोल अभियान झेलने को तैयार रहें. भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण ने विधायकों-सांसदों को ‘मास्टर प्लान’ भी दिया है. साथ ही अल्टीमेटम भी. अपने क्षेत्र के दलितों और वंचितों के लिए काम करेंगे तो सबक के लिए तैयार रहे.

विधायकों-सांसदों को ‘रावण’ का अल्टीमेटम

लंबे अर्से बाद सहारनपुर जेल से रिहा होने के बाद भी आर्मी के संस्थापक उर्फ रावण मीडिया में खुद को नॉन पॉलिटिकल बता रहे हैं. मगर उनकी हर बात और हर कदम राजनीतिक होता जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी पर लगातार सियासी हमले कर रहे हैं. बहुजन समाज पार्टी के प्रति नरमी बयानों में भी दिख रही है. जेल से निकलने के साथ ही चंद्रशेखर ने उन्हें बुआ कहा था.

इन सबके बीच चंद्रशेखर ने कहा कि ”दलितों के हक में आवाज नहीं उठाने वाले दलित सांसदों और विधायकों का बायकॉट देश भर में किया जाएगा. देश में करीब 131 सांसद और 1100 विधायक डॉक्टर अंबेडकर के बनाए संविधान में की गई रिजर्व सीट की व्यवस्था होने की वजह से कुर्सी पर जमे हैं. अगर वो दलितों के हित की बात नहीं करेंगे तो उनको बेनकाब करेंगे. भीम आर्मी का बहुजन समाज की आवाज को बुलंद करना और उनको न्याय दिलाना है”.

दलितों के लिए काम करें, वरना रहें तैयार

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विधायकों-सांसदों को ‘रावण’ का अल्टीमेटम मिल गया है. वे काम करें या भुगतने को तैयार रहें. चंद्रशेखर ने बीएसपी के संस्थापक कांशीराम के सियासी विचारधारा को आगे बढ़ाने की बात कही है. हालांकि अब मायावती की तरफ इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है. मगर पिछले 2-3 दिनों से जिस तरह चंद्रशेखर बीजेपी और बीएसपी को लेकर बयान दे रहे हैं, लगता नहीं कि मायावती ज्यादा दिन तक चुप रहेंगी. अब तक चंद्रशेखर को लेकर बीजेपी के तरफ से कोई बड़ा नेता बयान नहीं दिया है. शायद उनको भी मायावती के नेक्सट स्टैंड का वेट है.

भीम आर्मी शनिवार को सहारनपुर के अंबेडकर छात्रावास में प्रेस कॉन्फ्रेंस करना चाहती थी. हालांकि प्रशासन से परमिशन नहीं मिली. इसके चंद्रशेखर ने छुटमुलपुर में अपने समर्थकों को संबोधित किया. इस दौरान चंद्रशेखर ने कहा कि ”कांशीराम के रानीतिक मूवमेंट को खड़ा करना है. उनको कोई चलाए या न चलाए भीम आर्मी चलाएगी. मैंने बहुत कुछ कांशीराम की कार्यशैली से सीखा है”.

विधायकों-सांसदों को ‘मास्टर प्लान’ भी दिया

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इस मौके पर रावण ने कहा कि ”भीम आर्मी अक्टूबर से संघर्ष शुरू करेगी. पहला काम जेल में बंद बेगुनाहों को रिहा कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाने होंगे. सबूत जुटाकर जन समर्थन जुटाने के लिए गांव-गांव अभियान चलाएंगे. कई दलितों को रासुका जैसे गंभीर आरोप में मेरी तरह बंद रखा गया है. उनकी रासुका हटवाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी. भीम आर्मी के संस्थापक ने अपनी रिहाई पर आतिशबाजी और मिठाई बांट रहे समर्थकों से आग्रह किया कि ऐसा करने से लोग हमारे ऊपर उंगली उठा सकते हैं. हम गरीब लोग हैं इसलिए ऐसा करना बंद कर इस पैसे को गरीब बच्चों की पढ़ाई और किताबें दिलाने पर पर खर्च करें. गरीब, मुस्लिम, ओबीसी और दलित की मदद करें और बलिदान देने के लिए तैयार रहें”.

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