बिहार का वो ‘रेप गृह’, जहां लूट ली गई 29 बच्चियों की अस्मत!

बिहार का वो 'रेप गृह', जहां लूट ली गई 29 बच्चियों की अस्मत!

पटना। मुजफ्फरपुर के बालिका गृह (शेल्टर होम) के 44 में से 29 लड़कियों के साथ रेप मामले की बिहार सरकार सीबीआई जांच नहीं कराएगी. डीजीपी ने कहा कि वो पुलिस की जांच से संतुष्ट है. हालांकि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में कहा कि अगर राज्य सरकार सिफारिश करे तो सीबीआई से जांच करा सकते हैं. बिहार की विपक्षी पार्टियां मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रही है.

मुजफ्फरपुर से पटना होते हुए दिल्ली

पिछले दो महीने से सुर्खियों में चल रहा ये मुद्दा अब मुजफ्फरपुर से पटना होते हुए दिल्ली पहुंच चुका है. रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं. पुलिस सबूत जुटाने के लिए मिट्टी तक खोदवा रही है. मगर सबूत है कि मिल ही नहीं रहा. जांच, अब भी वहीं है जहां 2 महीने पहले था हालांकि सबूत जुटाने के नाम पुलिस हाथ-पैर मारते जरुर दिख रही है. मगर अब तक कुछ खास हासिल नहीं कर सकी है. जिसे लेकर मामले की सीबीआई जांच की मांग उठने लगी है. विपक्ष का आरोप है कि इस कांड में कई सफेदपोश और ऊंची रसूख रखने वाले लोग शामिल है. इन्हें बचाने के लिए जांच के नाम पर सिर्फ दिखावा हो रहा है.

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सबूत के लिए कैंपस की खुदाई

बिहार पुलिस का कहना है कि मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में रह रहीं 29 लड़कियों के साथ रेप की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है. 10 लड़कियों का अभी मेडिकल टेस्ट नहीं हुआ है. मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने अपने सोशल ऑडिट में पाया कि बिहार के बालिका गृहों में रह रही लड़कियों के साथ यौन शोषण किया जा रहा है. 100 पन्ने की इस रिपोर्ट को उसने बिहार सरकार को सौंपा. इसके बाद जाकर ये कार्रवाई चल रही है.

इस रिपोर्ट में कई बालिका गृहों का जिक्र है मगर मुजफ्फरपुर का बालिका गृह जांच के केंद्र में है. सबूत जुटाने के लिए मकान के कैंपस में खुदाई करवा रही है. पुलिस को शक है कि एक बच्ची की हत्या कर कैंपस में दफना दिया गया. इसी बिल्डिंग में सेवा संकल्प नाम की स्वयंसेवी संस्था बालिका गृह चलाती थी. बालिका गृह में रहनेवाली एक लड़की ने पुलिस को बताया था कि एक लड़की को मारकर यहां दबाया गया है. जिसके बाद से खुदाई की जा रही है.

दुराचार करनेवाले लोग कौन है?

राज्य के समाज कल्याण विभाग के संरक्षण में बालिका सुधार गृह चलते हैं. इसके लिए लाखों की फंडिंग की जाती है, और इसके मंत्री मंजू वर्मा है. 28 मई को समाज कल्याण विभाग के निर्देश पर ही मुजफ्फरपुर नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराया गया था. इस मामले में बालिका गृह के संचालक ब्रजेश ठाकुर समेत 10 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिसमें 7 महिलाएं हैं. सभी पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. इसमें एक महिला पर भी एक बच्ची के साथ समलैंगिक रिश्ता बनाने का आरोप है.

आरोपियों में ज्यादातर महिलाएं हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दुराचार करनेवाले लोग कौन है?. पुलिस इस सवाल का जवाब नहीं दे पा रही है. सिर्फ बच्चियों के बयानों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है. हालांकि मुजफ्फरपुर की एसएसपी हरप्रीत कौर कहती हैं कि जिसके खिलाफ सबूत होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी. चाहे वो कितना भी बड़ा व्यक्ति हो. इन सबके बीच मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के परिवार वालों का कहना है कि उन्हें फंसाया जा रहा है.

रसूखदार है ब्रजेश ठाकुर का परिवार

मुजफ्फरपुर बालिका गृह के संचालक और मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर का परिवार 1982 से प्रात: कमल नाम का एक हिन्दी अखबार भी निकालता है. उनके पिता राधा मोहन ठाकुर ने इसका प्रकाशन शुरू किया था. इन बालिका गृहों में 6 से 18 साल की वैसी लड़कियों को रखा जाता है जो अनाथ, भूली-भटकी, मानसिक रुप से बीमार या किसी दूसरे कारण से परिवार से अलग हो गई है. सरकार की तरफ से इन्हें संरक्षण हासिल होता है. फिलहाल मुजफ्फरपुर बालिका गृह में रहनेवाली लड़कियों को दूसरे बालिका गृहों में शिफ्ट किया गया है.

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