सोशल मीडिया पर झूठी और गंदी बात करनेवालों की अब खैर नहीं…

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सोशल मीडिया पर झूठी और गंदी बात करनेवालों की अब खैर नहीं...

सोशल मीडिया पर झूठी और गंदी बात करनेवालों की अब खैर नहीं...

दिल्ली। सोशल मीडिया पर अब ना गंदी बात की जा सकेगी, न झूठ चलेगा और न अफवाह उड़ेगी। सोशल मीडिया पर झूठी और गंदी बात करनेवालों की अब खैर नहीं है। अगर आपने ऐसा किया तो आपकी शामत आनी तय है। मोदी सरकार ने सोशल मीडिया के कमेंट्स को लेकर ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार करने को कहा है जिससे तुरंत एक्शन लिया जा सके। यानी अब किसी के लिए भी अन’सोशल’ होना घातक होगा।

अन’सोशल’ होना घातक

केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर गंदी बात, झूठी खबरें और अफवाह फैलाने वालों पर लगाम कसने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय में सचिव राजीव गौबा की अगुवाई में एक बैठक की गई है। इस बैठक में सोशल मीडिया के जरिए फेक कंटेंट फैलाने वालों पर लगाम लगाने के मुद्दे पर चर्चा की गई। बैठक में सूचना प्रसारण मंत्रालय और कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

गूगल, ट्विटर, फेसबुक को निर्देश

बैठक में गूगल, ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब के प्रतिनिधियों को इस बावत निर्देश दिए गए कि वो सोशल मीडिया पर कंटेंट रिव्यू सिस्टम बनाएं और सरकार से साझा करें। ये सिस्टम गंदी बातें, फेक न्यूज़ और अफवाह फैलाने वालों को ट्रेस करेगा। फिर ये जानकारी प्रशासन से साझा की जाएगी ताकि तुरंत एक्शन लिया जा सके। इसके जरिए हिंसक घटनाओं, बच्चों-महिलाओं से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट पर ख़ास नजर रहेगी। यानी अन’सोशल’ होना घातक ही नहीं खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मारने के बराबर ही होगा।

कम से कम 3 साल कैद

ऐसे कंटेंट पोस्ट करने या शेयर करने पर यूजर के प्रोफाइल को ब्लॉक कर दिया जाएगा। एंटी नेशनल कटेंट फैलने से रोकने के लिए भी बैठक में सुझाव लिये गए। जाहिर है सोशल मीडिया पर फेक और अफवाह वाले कंटेट रोकने के लिए सरकार भी अपनी तरफ से कानून को कड़ा करने में भी जुट गई है ताकि सही मायने में अन’सोशल’ होना घातक साबित हो। हालांकि 66-A के खत्म होने के बाद सरकार अलग से कानून तो नहीं लाएगी लेकिन IPC की मौजूदा धारा में बदलाव करके कड़ी सजा का प्रावधान किया जाएगा। ये अपराध गैर जमानती होगा और दोषी पाए जाने पर कम से कम 3 साल की कैद होगी।

भारत में 50 करोड़ इंटरनेट यूजर्स

भारत में 50 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हैं, 24 करोड़ से ज्यादा फेसबुक और 20 करोड़ से ज्यादा व्हाट्सएप यूजर्स हैं। सोशल साइट्स और नेट पर पूरे दिन कई तरह के फेक फोटो, वीडियो और मैसेज वायरल होते रहते हैं। अन’सोशल’ होना घातक तो है ही क्योंकि इसका असर लोगों के रवैये और घटनाओं में भी साफ दिखता है। ऐसे में गंदे, झूठे और अफवाह वाले कंटेंट के खिलाफ सरकार का नया सिस्टम काफी कारगर साबित होगा।

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