सुधर रहे हैं सोनिया और मेनका गांधी के रिश्ते? दोनों में इस वजह से बढ़ी थी दूरी

सुधर रहे हैं सोनिया और मेनका गांधी के रिश्ते? दोनों में इस वजह से बढ़ी थी दूरी

दिल्ली। कहते हैं राजनीति में ना कोई अपना होता और ना कोई पराया। वक्त के हिसाब से रिश्ते बदलते रहते हैं। कुछ ऐसे ही संकेत इन दिनों सोनिया गांधी और मेनका गांधी के रिश्तों को लेकर मिल रहे। जिससे संबंधों में सुधार के कयास लगाए जा रहे हैं कि मेनका और सोनिया के संबंधों में सुधार हो रहे हैं। ये चर्चा इसलिए जोरों पर है कि 31 अक्टूबर को कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी मेनका गांधी के मंत्रालय द्वारा आयोजित एक मेले में पहुंचीं, जिसके बाद से इसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।

संबंधों में सुधार के कयास

सुधर रहे हैं सोनिया और मेनका गांधी के रिश्ते? दोनों में इस वजह से बढ़ी थी दूरी

सोनिया-मेनका के संबंधों में सुधार के कयास के मायने इसलिए निकाले जा रहे हैं, बीजेपी में मेनका गांधी और वरुण गांधी इन दिनों हाशिए पर चल रहे हैं। वरुण भाजपा द्वारा आयोजित तमाम कार्यक्रमों से दूर रहते हैं। हाल ही में यूपी में प्रदेश कार्य समिति की बैठक हुई तो वरुण और मेनका नहीं पहुंचे थे। बल्कि उस बैठक में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह खुद मौजूद थे। मेनका गांधी उत्तर प्रदेश के पीलीभीत्त से तो वरुण सुल्तानपुर से सांसद हैं। ऐसे में पार्टी की मीटिंग से उनका दूर रहना सवाल तो खड़ा करता है।

मंत्रालय के मेले में सोनिया

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लेकिन सोनिया और मेनका के संबंधों में सुधार के कयास इसलिए हो रहे हैं कि 31 अक्टूबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में चल रहे राष्ट्रीय जैविक मेले में पहुंचीं। इस मेले का आयोजन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने किया है जिसकी मंत्री मेनका गांधी हैं। दरअसल, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में वुमन ऑफ इंडिया नेशनल ऑर्गेनिक फेस्टिवल का आयोजन किया है, जिसमें देश भर की महिलाओं ने ऑर्गेनिक उत्पादों का स्टॉल लगाया है। इस मेले में सोनिया गांधी कुछ देर के लिए नजर आईं।

हालांकि उस वक्त मेनका गांधी मौजूद नहीं थीं। लेकिन इस कार्यक्रम में उनका पहुंचना बेहद दिलचस्प है। सोनिया गांधी और मेनका गांधी में जेठानी-देवरानी का रिश्ता है। लेकिन दोनों के रिश्तों में खटास जगजाहिर है। ऐसे में सोनिया के उस मेले में जाना एक नए रिश्तों के संकेत हैं। दोनों के संबंधों में सुधार के कयास लगाए जा रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जब इस बाबत एक कांग्रेस के नेता से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ये रोचक है, कुछ तो चल रहा है।

आधी रात को निकाली गई थीं मेनका

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आइए अब आपको बताते हैं कि कैसे दोनों के बीच दूरियां बढ़ी थीं। दरअसल, एक वक्त में सोनिया और मेनका साथ रहती थीं। बताया जाता है कि दोनों के रिश्ते भी सहेलियों जैसे थे। लेकिन सब कुछ तब बिगड़ गया जब 1980 में विमान हादसे में संजय गांधी की मौत हो गई है। उस वक्त वरुण गांधी महज 3 महीने के ही थे। मेनका के लिए ये मुश्किल वक्त था। इस वजह से इंदिरा गांधी उनकी काफी फिक्र करती थीं। उनको इंगेज रखने के लिए इंदिरा राजीनितक कार्यक्रमों से जोड़े रखती थीं। लेकिन मेनका उस वक्त बड़ा झटका लगा जब राजीव गांधी की राजनीति में एंट्री हुई। संजय की विरासत संभालने का सपना देख रही मेनका को यह पसंद नहीं आया। तब से ये रिश्ता खराब है और अब संबंधों में सुधार के कयास लगाए जा रहे हैं.

जेवियर मोरो ने अपने किताब में लिखा है कि इस बात को लेकर मेनका हमेशा इंदिरा के सामने एतराज जताती थी, जिससे इंदिरा गांधी नाराज रहने लगी। ये तल्खियां दोनों के बीच इतनी बढ़ गई कि 1982 में मेनका गांधी को इंदिरा गांधी ने आधी रात को घर से निकाल दिया। उसके बाद मेनका ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और संजय समर्थकों के साथ राष्ट्रीय संजय मंच बना लिया। 1984 में वो राजीव गांधी के खिलाफ अमेठी से चुनाव भी लड़ीं लेकिन करारी हार हुई। उसके बाद से मेनका और सोनिया में तल्खियां बढ़ती गई। दोनों के बीच इतनी दूरियां बढ़ गईं एक-दूसरे के बच्चों की शादी में भी नहीं गए।

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