बिहार में अगर चुनाव टलता है तो किसे फायदा और किसे नुकसान? गुणा-गणित समझिए

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पटना। कोरोना काल में जब शहर-बाजार खोलना रिस्की है तो बिहार की मौजूदा सरकार (Nitish Kumar) तय वक्त पर चुनाव क्यों चाहती है? बिहार की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 29 नवंबर को खत्म हो जाएगा, जाहिर है उससे पहले चुनाव कराना होगा. जेडीयू चाहती है कि चाहे जो भी हो चुनाव समय पर ही होना चाहिए, साफ-साफ कुछ भी बोलने से बीजेपी बच रही है. बिहार और केंद्र की सत्ता में हिस्सेदार लोक जनशक्ति पार्टी (चिराग पासवान) चुनाव की तारीख आगे बढ़वाने पर अड़े हैं.

Nitish Kumar माहिर ‘खिलाड़ी’ हैं

बिहार की सत्ता तकरीबन 15 साल से Nitish Kumar के आसपास घुम रही है. बीजेपी उसमें छोटे भाई का रोल अदा करती आ रही है. अमित शाह कह चुके हैं कि 2020 में भी नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनेंगे. वैसे राजनीति में कब क्या हो जाए कहना बड़ा मुश्किल होता है. लालू प्रसाद के पास कभी न जाने की कसमें खाने वाले नीतीश कुमार लालू प्रसाद के बदौलत सीएम बने और फिर बीजेपी के पाले में आ गए. जब नीतीश कुमार लालू प्रसाद के पास गए थे तो बीजेपी के पास न आने की कसमें खाए थे. ऐसे में राजनीति की लकीर बहुत महीन होती है राजनेता कभी भी अपनी सुविधा के लिए मिटा देते हैं. सियासत में कुछ भी संभव और असंभव नहीं है.

JDU के फायदे पर BJP की नजर

मगर जो मौजूदा हालात है उसमें Nitish Kumar की पार्टी अक्टूबर-नवंबर में चुनाव चाहती है. नीतीश कुमार करोड़ों की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन में व्यस्त हैं. पिछले हफ्ते उन्होंने 30 हजार करोड़ की 300 से ज्यादा योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. वैसे इस तरह के कार्यक्रम में बीजेपी कोटे से डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी मौजूद रहते हैं मगर कुछ तवज्जो को उनको मिलती नहीं है.

अगर चुनाव टाल दिया जाता है तो केंद्र में बीजेपी की सरकार होने की वजह से वो इसका फायदा लेना चाहेगी. बराबर का हिस्सेदारी चाहेगी. इस तरह की योजनाओं का फायदा उठाने की कोशिश करेगी. यहां के सिस्टम (नौकरशाही) को अपना बनाने की कोशिश करेगी. वही दूसरी ओर जेडीयू (Nitish Kumar) यह बिल्कुल नहीं चाहती कि बिहार में राष्ट्रपति शासन लगे और उसका नौकरशाही पर से कंट्रोल हट जाए. शायद यही वजह है कि केवल जेडीयू चाहती है कि चुनाव समय पर हो. चुनाव के मसले पर बीजेपी के नेता गोल-मोल जवाब देते हैं और चुनाव आयोग के मत्थे ठिकरा फोड़ देते हैं.

‘मौसम वैज्ञानिक’ से ‘कालीदास’ तक

लोक जनशक्ति पार्टी के नए-नवेले सुप्रीमो चिराग पासवान ने तो मानो नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. शायद ही कोई दिन होता हो जब वो Nitish Kumar के खिलाफ कुछ न बोलते हों. पहले जेडीयू की चरफ से जवाब नहीं आता था मगर अब तो पूरा जवाब मिल रहा है. खास बात ये कि जेडीयू और एलजेपी के तकरार में बीजेपी पूरी तरह खामोश है. जेडीयू और बीजेपी के सीट शेयरिंग में जेडीयू के खाते में ज्यादा सीटें होती है. माना जा रहा है कि पिछली बार से कुछ सीटों पर एलजेपी की नजर है और ये बयानबाजी प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा हो सकता है.

चिराग पासवान ने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखकर चुनाव टालने की मांग की है. इसके लिए आयोग से वजहें भी गिनाई है. उन्होंने साफ-साफ कहा है कि मौजूद हालात में चुनाव कराना सही फैसला नहीं होगा. जितना संभव हो चुनाव टाल देना चाहिए. चिराग के बयानों से जेडीयू नाराज है. जेडीयू के सीनियर नेता ललन सिंह ने यहां तक कह दिया कि चिराग पासवान ‘कालीदास’ हैं, जिस डाल पर बैठते हैं उसी को काटते हैं. चिराग पासवान के पिता रामविलास पासवान को लालू प्रसाद ‘मौसम वैज्ञानिक’ कहकर कई बार सार्वजनिक मंच से संबोधित कर चुके हैं. यानी जिसकी सत्ता, पासवान परिवार उसी के साथ. मगर इस बार चिराग पासवान को ‘कालीदास’ का तमगा मिला है.

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