#MeToo: ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के लिए खतरा बन गए थे अकबर, मध्य प्रदेश में होता बड़ा नुकसान

एमजे अकबर का इस्तीफा

दिल्ली। #MeToo कैंपेन के तहत मोदी सरकार में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर पर 20 महिला पत्रकारों ने शोषण के आरोप लगाए थे। विदेश दौरे से लौटने के 72 घंटे के बाद एमजे अकबर का इस्तीफा हो गया। उन्होंने अपने इस्तीफे के लिए आठ पंक्तियों में 83 शब्दों का जिक्र किया है। वहीं, अकबर के इस्तीफे के बाद कांग्रेस मोदी सरकार पर अटैकिंग मोड में आ गई है।

एमजे अकबर का इस्तीफा

दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के मुरैना में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मोदी सरकार पर तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि ‘बेटी पढ़ाओ और बीजेपी के नेताओं और विधायकों से बचाओ’। एमजे अकबर का इस्तीफा नहीं होता तो भाजपा को भी अंदाजा हो गया था कि अकबर इस्तीफा नहीं देते हैं तो कांग्रेस मध्य प्रदेश में इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश करेगी।

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‘कानूनी लड़ाई लड़ना चाहता हूं’

एमजे अकबर ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि ‘मैंने निजी हैसियत से अपने ऊपर लगे आरोपों के खिलाफ लड़ने का फैसला किया है। मेरे ऊपर लगे सभी तरह के झूठे आरोपों के खिलाफ मैं कानूनी लड़ाई लड़ना चाहता हूं, यहीं कारण है कि मैंन अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं। मैंने अपना इस्तीफा विदेश मंत्री के कार्यालय को भेज दिया है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को देश सेवा का मौका देने के लिए धन्यवाद देता हूं’। कांग्रेस के अटैक को देखते हुए बीजेपी ने एमजे अकबर का इस्तीफा ले लिया. दरअसल, वे विदेश दौरे से लौटने के बाद कहा था कि ‘चुनाव से पहले मेरी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। एमजे अकबर ने कहा था कि झूठ के पाव नहीं होते, लेकिन उसमें जहर होता है। वे उचित कानूनी कार्रवाई करेंगे’।

वहीं, एमजे अकबर का इस्तीफा तो हो गया मगर अकबर के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार पर वार करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा है कि ‘वह उन महिलाओं को सलाम करती हैं जिन्होंने आवाज उठाई थी। उनका इस्तीफा सच की ताकत की अभिपुष्टि और जीत है। उन्होंने कहा कि मैं उन महिलाओं को सलाम करती हूं जो सत्ता के अहंकार के समाने डट कर खड़ी रहीं’।

NSUI अध्यक्ष का इस्तीफा

दरअसल, एमजे अकबर का इस्तीफा नहीं होता तो कांग्रेस मध्यप्रदेश में इसे चुनावी मुद्दा बनाती। एमजे अकबर मध्यप्रदेश से ही राज्यसभा सांसद हैं। क्योंकि एमजे अकबर से एक दिन पहले ही एनएसयूआई के अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया था। उन पर भी एक महिला ने कांग्रेस कार्यकर्ता ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे।

ऐसे कहा जा रहा है कि अगर एमजे अकबर का इस्तीफा नहीं होता तो कांग्रेस एमपी महिला सुरक्षा के मुद्दे को उछालती। क्योंकि पहले से ही कांग्रेस इसे लेकर भाजपा पर अटैकिंग थी। जगह-जगह पर एमजे को लेकर पोस्टर लगाए जा रहे थे। ‘बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ’ के नारों के जरिए मोदी सरकार पर वार किया जा रहा था।

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