बाल-बाल बचे उद्धव ठाकरे, टेक ऑफ से पहले रनवे पर आई नीलगाय

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बाल-बाल बचे उद्धव ठाकरे

अयोध्या से मुंबई लौटते हुए बाल-बाल बचे उद्धव ठाकरे। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे राम मंदिर आंदोलन के लिए अयोध्या पहुंचे थे। वहां से लौटते वक्त बड़ा हादसा होते-होते टल गया। दरअसल, उनका प्लेन रनवे से टेकऑफ करने ही वाला था कि सामने से नीलगाय आ गई।

बाल-बाल बचे उद्धव ठाकरे

टेक ऑफ के पहले रनवे पर नीलगाय आने के बाद भी उद्धव ठाकरे का विमान सुरक्षित रवाना होगा। कुल मिलाकर बाल-बाल बचे उद्धव ठाकरे लेकिन जिस तरह से नीलगाय अचानक रनवे पर रफ्तार पकड़ चुके चार्टर्ड प्लेन के आगे आई, उससे कोई बड़ा हादसा हो सकता था। अयोध्या से वापसी से पहले रविवार सुबह अपने परिवार के साथ उद्धव ठाकरे रामलला की आरती में शामिल हुए।

बाल-बाल बचे उद्धव ठाकरे

अयोध्या में बीजेपी पर बरसे

उद्धव ठाकरे अपने अयोध्या दौरे के दौरान मोदी सरकार पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि सरकार कुछ भी करे, कानून बनाए या अध्यादेश लाए, राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब हिंदू ताकतवर हो गया है, अब वो मार नहीं खाएगा। अगर केंद्र सरकार मंदिर नहीं बना सकती है तो कह दे कि ये भी एक चुनावी जुमला था।

उद्धव ठाकरे शनिवार को ही अयोध्या पहुंच गए थे। उसके बाद उन्होंने सरयू तट पर आरती की। साधू-सतों और शिवसैनिकों को संबोधित करते हुए उद्धव ने कहा था कि वो राम मंदिर का श्रेय लेने नहीं आए हैं, बल्कि चार साल से सोई हुई सरकार को कुंभकर्ण की नींद से जगाने आए हैं। हालांकि वहां से लौटते वक्त उनकी जान बच गई। रनवे पर नीलगाय आने पर बाल-बाल बचे उद्धव ठाकरे।

बाल-बाल बचे उद्धव ठाकरे

हिंदूवादी संगठनों का जमावड़ा

दरअसल, अयोध्या में राम मंदिर बनाने को लेकर विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, विभिन्न अखाड़ों से जुड़े साधू-संत और तमाम हिंदूवादी संगठन इकट्ठा हुए हैं। वीएचपी जहां इसे धर्म संसद का नाम दे रही है तो वहीं शिवसेना का डेरा डालना कुछ और ही मकसद बयां करता दिखा।

2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार बनते ही तमाम हिंदूवादी संगठनों में राम मंदिर निर्माण को लेकर उम्मीद जगी…लेकिन साल दर साल बीत बीतते गए और इस मसले पर कोई सुगबुगाहट नजर नहीं आई। फिर पिछले साल यानी 2017 में जब यूपी में बीजेपी की सरकार बनी और योगी आदित्यनाथ सीएम बने तो हिंदूवादी संगठनों की उम्मीदों को फिर थोड़ा बल मिला, लेकिन हासिल कुछ नहीं हुआ।

अब 2019 का चुनाव सिर पर है, सभी हिंदूवादी संगठन इसे एक मौके की तरह देख रहे हैं। सरकार पर मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने का दबाव बनाया जाने लगा है।

शिवसेना का मकसद

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उद्धव ठाकरे ये जरूर कह रहे हैं कि वो राजनीति करने अयोध्या नहीं आए…लेकिन सच यही है कि शिवसेना भी राम मंदिर निर्माण मुद्दे के जरिये अपनी खोई हुई जमीन वापस पाना चाहती है।

शिवसेना की छवि 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद कट्टर हिंदूवादी दल की बन गई। हालांकि पार्टी को इसका फायदा भी मिला, लेकिन धीरे-धीरे असर कम होता गया और फायदा उठाती गई बीजेपी। महाराष्ट्र में शिवसेना के पीछे खड़ी दिखती बीजेपी अब उसके समानांतर हो चुकी है…जो शिवसेना को नागवार गुजर रहा है।

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