सफरनामा: चाय की दुकान पर काम करनेवाला मदन कैसे बना दाती महाराज…

सफरनामा: चाय की दुकान पर काम करनेवाला मदन कैसे बना दाती महाराज...

दिल्ली। टेलीविजन चैनलों पर दूसरों का ग्रह-नक्षत्र, राशिफल और भाग्यफल बताने वाले दाती महाराज की किस्मत इन दिनों खराब चल रही है. रेप के आरोपों की वजह से चर्चा हैं. तकरीबन सभी चैनलों को इंटरव्यू देकर खुद को पाक-साफ बताने में लगे हैं. बार-बार ये कह रहे हैं कि वो फरार नहीं हैं. बचपन में पीएम मोदी की तरह चाय बेचा करते थे.

दाती महाराज का पुश्तैनी काम था ढोलक बजाना

अपनी कामयाबी की बदौलत दिल्ली के छतरपुर में मशहूर शनिधाम मंदिर की स्थापना की. जिसकी चर्चा दूर-दूर तक है. दाती महाराज का जन्म राजस्थान के पाली जिले के अलवस गांव में हुआ था. मेघवाल समुदाय से ताल्लुक रखनेवाले दाती का परिवार कभी ढोलक बजाकर पेट पालता था. मदन के पिता देवाराम भी ढोलकर बजाने का काम करते थे. जन्म के चार महीने बाद ही मदन के मां की मौत हो गई थी. बच्चो की जिम्मेदारी भी पिता ने ही संभाली. कुछ दिनों बाद मदन के पिता देवाराम की भी मौत हो गई. इसके बाद मदन एक शख्स के साथ दिल्ली आ गए और चाय की दुकान पर काम करने लगे.

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चाय बेचने के साथ-साथ कैटरिंग काम किया

चाय की दुकान पर काम करने के साथ ही मदन ने जरुरतों के पूरा करने के लिए इधर-उधर का छोटे-मोटे काम करने लगे. बाद में कैटरिंग का धंधा शुरू किया. कैटरिंग काम चल निकला. 1996 तक मदन ने कैटरिंग का काम किया. काम दौरान ही मदन राजस्थान के रहनेवाले एक भविष्यवक्ता के संपर्क में आए. मदन ने उसे अपना गुरु बना लिया. ज्योतिष का ज्ञान सीखने लगे. ज्योतिष का ज्ञान सीखने के बाद मदन ने अपना नाम बदला और नया नाम रखा दाती महाराज.

ऐसे बदली मदन से दाती महाराज की किस्मत

दाती महाराज बनने के बाद मदन ने दिल्ली के कैलाश कॉलोनी में अपना पहला ज्योतिष सेंटर खोला. इस सेंटर की बदौलत भले ही दूसरों की किस्मत न बदली हो मदन की किस्मत जरुर बदल गई. ज्योतिष सेंटर की बदौलत वो दल्ली के कई कारोबारियों और नेताओं के संपर्क में आए. किसी नामी शख्स के जीवन के बारे में दाती महाराज ने भविष्यवाणी की और वो सटीक साबित हुई. उसने खुश होकर दाती महाराज को फतेहपुर बेरी में अपना पुश्तैनी मंदिर दान कर दी. इसके बाद दाती महाराज ने अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए आसपास की जमीने कब्जे में ले ली और शनिधाम मंदिर की स्थापना की. कई न्यूज चैनलों पर दाती महाराज के ज्योतिष के प्रोग्राम चलने लगे. इसके बाद तो दिन दूनी रात चौगुनी दाती महाराज की ख्याति बढ़ने लगी.

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दिल्ली के शनिधाम का कैंपस करीब 7 एकड़ में

दाती महाराज ने जिस शनिधाम मंदिर की स्थापना की वो आज साउथ दिल्ली के पॉश इलाके छतरपुर में पड़ता है. दाती महाराज का शनिधाम मंदिर का कैंपस करीब 7 एकड़ में फैला है. उसके आसपास देश के कई रईस लोगों की कोठिया और फॉर्म हाउस है. मदन से दाती महाराज बनने के बाद उन्होंने अपने पाली में लवारिस बच्चों के लिए एक आश्रम बना डाला. दाती महाराज के चिल्ड्रेन होम को कोई जगहों से फंडिंग होती है. दाती महाराज का एक स्कूल भी है जिसमें करीब एक हजार बच्चे पढ़ते हैं. स्कूल में हॉस्टल और गोशाला भी है.

ज्योतिषाचार्य से आयुर्वेदाचार्य बनने की तैयारी

ज्योतिषाचार्य के तौर मशहूर होने के बाद दाती महाराज अब आयुर्वेदाचार्य भी बनने में लगे हुए हैं. दाती महाराज ने आयुर्वेद में अपना लिटरेचर छापने और बेचने का कारोबार भी शुरु कर चुके हैं. फिलहाल दाती महाराज के एक मेडिकल कॉलेज प्रॉसेस में है. नाम अभी तय नहीं हुआ है. दाती महाराज ने अपने आश्रम को चलाने के लिए एक कमेटी बनाई, जिसका बजट करोड़ों में है. इस कमेटी के लोगों पर दाती ने पैसे हजम करने का आरोप लगाया है. हर साल शानि आमवस्या के दिन शनि धाम में बड़ा प्रोग्राम होता है. कई चैनलों पर इसका लाइव टेलिकास्ट किया जाता है. करोड़ों का चंदा दाती महाराज के अनुयायियों से आता है. 2010 में हुए हरिद्वार कुंभ में दाती महाराज को महामंडलेश्वर की उपाधि मिली थी.

दाती महाराज पर ये है लड़की का आरोप

पाली की एक लड़की ने दाती महाराज और उनके सहयोगियों पर 25, 26 और 27 मार्च 2016 को बार-बार रेप करने का आरोप लगाया है. साउथ दिल्ली के फतेहपुर बेरी थाने में युवती ने दाती महाराज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. लड़की ने पुलिस को बताया कि करीब एक दशक तक वो दाती महाराज की अनुयायी थी. मगर दाती महाराज और उनके चेलों द्वारा बार रेप करने के बाद वो अपने घर लौट गई. युवती ने ये आरोप लगाया है कि बाबा की एक दूसरी महिला अनुयायी उसे महाराज के कमरे में जबरन भेजती थी. मना करने पर वो धमकाती थी. करीब 2 साल पहले वो आश्रम से भाग गई और डिप्रेशन में रही. ठीक होने के बाद वो पूरी बात अपने माता-पिता को बताई फिर थाने में शिकायत दर्ज कराई. हालांकि दाती महाराज बार-बार सफाई दे रहे हैं.

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