प्रशांत किशोर को ममता सरकार ने दी ‘जेड’ श्रेणी की सुरक्षा, अब बेफिक्र रहेंगे PK

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कोलकाता। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को पश्चिम बंगाल (West Bengal) सरकार ने जेड श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला किया है. पिछले साल ही तृणमूल कांग्रेस ने पीके को अपनी चुनावी रणनीति की जिम्मेदारी सौंपी है. टीएमसी से जुड़ने के बाद ममता सरकार से उन्हें जेड कैटेगरी की सुरक्षा मुहैया कराई गई है. राज्य (West Bengal) गृह मंत्रालय के सूत्रों की मानें तो प्रशांत किशोर एक जाने-माने चुनावी रणनीतिकार हैं, ऐसे में वो विरोधियों के निशाने पर हो सकते हैं. इसलिए उन्हें जेड सुरक्षा देने का फैसला लिया गया.

West Bengal में अगले साल चुनाव

पश्चिम बंगाल (West Bengal) पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रशांत किशोर को लेकर कई खुफिया इनपुट मिल रहे थे कि उनपर हमला हो सकता है. इसी के मद्देनजर उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा दी गई है. अब प्रशांत किशोर जहां भी जाएंगे उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी. इसका मतलब ये हुआ कि अब प्रशांत के आगे-पीछे दर्जन भर सुरक्षा अधिकारियों की टीम रहेगी.

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बंगाल (West Bengal) में बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए तृणमूल कांग्रेस ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की मदद ले रही है. इस साल अप्रैल-मई में राज्य के 107 नगरपालिकाओं सहित कोलकाता और हावड़ा नगर निगम में चुनाव है. जबकि अगले साल बंगाल (West Bengal) में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में प्रशांत किशोर की भूमिका को तृणमूल काफी अहम मान रही है. आज कल प्रशांत किशोर के फॉर्मूले को ही तृणमूल अपना रही है.

प्रशांत किशोर की कामयाबियां

2014 लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी और 2015 बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार को जबर्दस्त कामयाबी मिली. इस जीत के पीछे रणनीतिकार कहे जाने वाले पीके उर्फ प्रशांत किशोर का दिमाग माना जाता है. 2014 में नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली एनडीए ने कांग्रेस को बुरी तरह हराया था जबकि एक साल बाद ही बिहार में नीतीश के नेतृत्व में महागठबंधन ने एनडीए को मात दे दी. इसके पीछे प्रशांत किशोर की रणनीति मानी जाती है.

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कहा जाता है कि 2014 लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी, 2015 बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार, 2017 पंजाब विधानसभा चुनाव में अमरिंदर सिंह और 2019 आंध्र प्रदेश चुनाव में जगन मोहन रेड्डी को जीत दिलाने में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की अहम भूमिका रही है. प्रशांत किशोर 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल के लिए काम किया. 2021 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के लिए काम कर रहे हैं.

प्रशांत किशोर की निजी जिंदगी

राजनीति की रणनीति बनाने वाले इस माहिर खिलाड़ी जन्म 1977 में हुआ था. प्रशांत किशोर का पैतृक गांव कोनार बिहार के बक्सर जिले में है. वो अफ्रीका से संयुक्त राष्ट्र (UN) की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए थे. प्रशांत किशोर की पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उनके पिता बिहार सरकार में डॉक्टर थे और मां हाउस वाइफ. प्रशांत की पत्नी जाह्नवी दास असम के गुवाहाटी में डॉक्टर हैं. प्रशांत और जाह्नवी का एक बेटा है. ज्यादातर समय प्रशांत किशोर दिल्ली में रहते हैं.

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नीतीश और प्रशांत का विवाद

प्रशांत किशोर की राजनीतिक सूझबूझ और रणनीति की चारों तरफ चर्चा रही है. उन्हें ‘सीएम मेकर’ तक का खिताब मिल चुका है. आज भले ही नीतीश कुमार अपनी पार्टी से उन्हें निकाल दिए हों, मगर साल 2015 विधानसभा चुनाव के दौरान वो प्रशांत किशोर को अपने आवास में अपने साथ रखते थे. बाद में सरकार बनने पर उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया, अपनी पार्टी में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया और जनता दल यूनाइटेड का भविष्य भी बताया था.

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