दिल्ली चुनाव का प्रशांत किशोर एंगल, पटना में PK करेंगे बड़ा एलान

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दिल्ली। Delhi Exit Poll के नतीजे कम से कम अरविंद केजरीवाल की वापसी तो बता ही रहे हैं. दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर अरविंद केजरीवाल के लिए काम कर रहे थे, ये बात किसी से छिपी नहीं है. हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी ने कुछ नहीं कहा.

Delhi Exit Poll क्यों है खास?

प्रशांत किशोर की यही खासियत है कि वो अपना काम कर के धीरे से निकल जाते हैं, बिल्कुल एक पेशेवर की तरह. दिल्ली चुनाव में केजरीवाल की जीत में प्रशांत किशोर एंगल जरूर है. राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर सियासी गलियारे में PK के नाम से मशहूर हैं.

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दिल्ली के बाद उनके एजेंडे में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में डीएमके पार्टी चीफ एम स्टालिन हैं. जबकि कर्नाटक में जेडीएस के देवेगौड़ा प्रशांत किशोर पर नजरें गड़ाए बैठे हुए हैं. यानी PK बिजी, बहुत बिजी हैं. Delhi Exit Poll ने प्रशांत किशोर करियर के लिए काफी अहम बना दिया है.

11 को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस

जिस बिहार से प्रशांत किशोर आते हैं वहां उन्हें कोरोना वायरस तक कहा गया. जिस जेडीयू में नीतीश कुमार ने उन्हें पार्टी का भविष्य बता कर लाया था उस जेडीयू से एक झटके में निकाल दिए गए. 2015 की मोदी लहर में नीतीश कुमार की वापसी की रणनीति प्रशांत ने ही बनाई थी.

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एक सोची-समझी रणनीति के तहत प्रशांत ने 11 फरवरी को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का एलान किया है. 11 फरवरी को ही दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे. प्रशांत की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर दिल्ली में मात खा रही बीजेपी (Exit Poll में) और बीजेपी के साथ दिल्ली में चनाव लड़ रही जेडीयू (नीतीश कुमार) की भी नजर रहेगी.

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चूकि बिहार में कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल ने प्रशांत को लेकर ‘अच्छा’ ही कहा है या फिर नहीं कहा है. शायद प्रशांत की रणनीतिक ताकत का इन्हें अहसास है. दिल्ली के बिहार में विधानसभा की चुनाव है. अब 11 फरवरी को सब की नजरें दिल्ली विधानसभा के रिजल्ट के साथ-साथ पटना में प्रशांत किशोर की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी लगी रहेगी.

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PK का नीतीश से मनमुटाव

कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण प्रशांत किशोर के साथ-साथ पवन वर्मा को भी जेडीयू ने पार्टी से निकाल दिया है. दरअसल नए बने नागरिकता कानून को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाली पार्टी के रूख पर दोनों नेताओं ने बार-बार सवाल उठाए थे. प्रशांत किशोर ने सीएए और एनआरसी पर पार्टी से अपने मतभेद जाहिए किए थे. उसके बाद जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार ने दोनों नेताओं से कहा था कि वह पार्टी छोड़कर जहां भी जाना चाहें जा सकते हैं.

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