अमित शाह के इन मुलाकातों से 2019 में नई दिखेगी बीजेपी! नए चेहरों की तलाश तो नहीं?

अमित शाह के इन मुलाकातों से 2019 में नई दिखेगी बीजेपी!

दिल्ली। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह 2019 की तैयारियों में अभी से जुट गए हैं। 2019 से पहले उन्होंने महासंपर्क अभियान शुरुकर बीजेपी के चुनाव अभियान को एक नई दिशा दी है।

इस अभियान के तहत अमित शाह देश के प्रमुख लोगों के घर जा रहे हैं और उनसे मुलाकात कर मोदी सरकार के चार साल की उपलब्धियों के बारे में बता रहे हैं। शाह के इस चाल की भनक ऐसे विपक्ष को नहीं लगी लेकिन उन्होंने चुनाव से करीब एक साल पहले इस अभियान को शुरू कर सबको हैरान कर दिया है।

नामचीन हस्तियों से शाह की मुलाकात

अमित शाह इस अभियान के तहत किसी को भी मिलने के लिए नहीं बुला रहे हैं वो खुद ही लोगों के दरवाजे तक जा रहे हैं। जो लोगों के मन को छूने वाली है और उन्हें संतुष्टि देने वाली है। लेकिन शाह ये सबकुछ एक खास रणनीति के तहत कर रहे हैं।

ये सबकुछ वो मिशन 2019 के लिए कर रहे हैं। शाह ने अब तक जिन लोगों से मिले हैं, उनमें अगर बाबा रामदेव को छोड़ दें तो पूर्व सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग, संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप, पूर्व क्रिकेटर कपिल देव, माधुरी दीक्षित और रतन टाटा जैसे लोगों ने खुद को न सिर्फ पिछले चार साल में बल्कि अपने पूरे कैरियर में राजनीति से दूरी बनाए रखा है। इनलोगों की मुलाकात नेताओं से यदकदा किसी कार्यक्रम के दौरान हो जाती है लेकिन ये लोग किसी के लिए ऐसे वोट मांगने नहीं गए हैं।

ये लिस्ट तो वैसे लोगों की है, जिनसे अमित शाह व्यक्तिगत तौर पर उनके आवास पर जाकर मिल चुके हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में शाह देश के और बड़े शख्सियतों से मुलाकात कर सकते हैं।

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कहीं कुछ तलाश तो नहीं?

ऐसे में इन मुलाकातों के पीछे की फायदे ये हैं कि अगर ये लोग 2019 के चुनाव में बीजेपी का खुलकर समर्थन भी नहीं करेंगे, कम से कम कोई दूसरी पार्टी तो इन्हें अपने पाले में नहीं ही खींच पाएगी। इसके साथ ही जब खुद इनके घर जाकर शाह ने मुलाकात कर ली है तो ये लोग आलोचना भी खुलकर नहीं कर पाएंगे।

इसके साथ ही अगर शाह ने जिन लोगों से मुलाकात की है, उसमें से कुछ चेहरे भी अगर 2019 में बीजेपी के साथ आने को तैयार हो जाते हैं तो मोदी और मजबूत होंगे। क्योंकि 2014 में कई चर्चित चेहरे पार्टी से जुड़े थे।

ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि 2014 वाले जिन चेहरों की चमक अब फीकी पड़ गई है। उन चेहरों को अब नए चेहरे से बदला जा सकता है। अगर ये बदलाव होता है तो 2019 में बीजेपी भी नई दिखेगी। राजनीति के जानकारों का भी मानना है कि शाह इसी नीति के तहत लोगों से मिल रहे हैं।

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