‘ओ खादेरन की मदर, जानत बाड़ू, मेहरारू के मूंछ काहे ना होला और मर्द के…

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पटना। ‘ओ खादेरन की मदर, जानत बाड़ू, मेहरारू के मूंछ काहे ना होला और मर्द के माथा के बाल काहे झड़ जाला?’ जवाब- ‘सुन लअ, मेहरारू लोग जबान से काम लेला, ई से मूंछ झर जाला और मर्द लोग दिमाग से काम लेला, एही से कपार के बाल झड़ जाला.’ 90 के दशक में लालू प्रसाद (Lalu prasad) अपने भाषणों का इसका जिक्र कर लोगों को खूब हंसाते थे. ऑल इंडिया रेडियो पर प्रसारित होने वाले सीरियल लोहा सिंह के डायलॉग को लालू प्रसाद ने अपनी जीवनी ‘गोपालगंज टू रायसीना- माई पॉलिटिकल जर्नी’ में याद किया है. लोहा सिंह ब्रिटिश फौज से रिटायर सैनिक थे जिनके डायलॉग को लोग खूब सुना करते थे. इनके चाहने वालों में लालू प्रसाद (Lalu prasad) भी शुमार थे.

44 साल बाद बिन लालू चुनाव

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लालू प्रसाद 1977 में चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे. 44 साल बाद पहली बार ऐसा चुनाव हो रहा है जिसमें लालू प्रसाद (Lalu prasad) की फिजिकल अपीयरेंस नहीं है. हालांकि शायद कोई दिन होता होगा जब स्थानीय मीडिया में उनका जिक्र न होता हो. अपने ट्विटर और दूसरे माध्यमों में रोजाना आखबारों में छाए रहते हैं. फिलहाल वो (Lalu prasad) चारा घोटाले के कई मामलों में जेल में बंद हैं. इलाज के लिए वो रिम्स में भर्ती हैं, मगर बिहार-झारखंड के बड़े राजनेता हर शनिवार को उनसे मिलने जाते हैं और हर शनिवार को रिम्स के बाहर मीडिया का जमावड़ा लगा रहता है. खूब बयान देते हैं और फिर वो अगले दिन की सुर्खियां बन जाती है. यानी लालू प्रसाद चुनाव से बाहर नहीं हैं, भले ही वो शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं लेकिन उनकी बातें लोगों तक पहुंच रही है.

मिमिक्री मास्टर Lalu prasad

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2015 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी तमाम कोशिशों और संसाधनों के बावजूद नरेंद्र मोदी और अमित शाह लालू प्रसाद यादव (Lalu prasad) से पार नहीं पा सके थे. इस चुनाव में भी लालू प्रसाद ने जमकर नरेंद्र मोदी की जमकर नकल की और लोगों को खूब हंसाया. लालू के ये अंदाज लोगों को खूब पसंद भी आया. अपनी एक चुनावी सभा में लालू प्रसाद ने कहा कि ‘मोदी जी इस अंदाज में मत बोलिए वरना गर्दन की नस खींच जाएगी’. बिहार को पैकेज देने नाम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी घोषणा की नकल भी लालू ने बखूबी उतार कर दिखाई थी.

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पब्लिक से कनेक्ट करने के लालू प्रसाद (Lalu prasad) के अंदाज ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के जादू को कम कर दिया था. लालू प्रसाद ने बायोग्राफी में बताया है कि ‘बेहद कम उम्र से ही उन्हें मिमिक्री का शौक हो गया था. मैं नहीं जानता कि मिमिक्री कहां से सीखी मैंने, मगर मैं इसमें बहुत अच्छा था. मेरे दोस्त और मेरे शिक्षकों को यह खूब पसंद आता था. मेरे स्कूल में एक बार द मर्चेंट ऑफ वेनिस नाटक खेला गया. मैंने उसमें शायलॉक रोल किया था. लोगों को मेरी (Lalu prasad) डायलॉग डिलिवरी बेहद पसंद आई थी’.

‘ओ गाय चराने वालों, ओ…’

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लालू प्रसाद (Lalu prasad) जब काफिला लेकर निकलते थे तो कहीं भी कार से उतर कर चिल्लाने लगते…’ओ गाय चराने वालों, ओ बकरी चराने वालों, ओ ताड़ी पीने वालों वोट देना सीखो’. बैलेट पेपर के बाद जब ईवीएम का जमाना आया तो लालू प्रसाद अपनी चुनावी सभाओं में ईवीएम से कैसे वोट देते हैं ये बताना नहीं भूलते. काफी विस्तार से बताने के बाद जब लालू प्रसाद (Lalu prasad) पीं…ईईई….की आवाज का जिक्र करते तो भाषण सुनने आए लोग खूब ठठा कर हंसते थे. इस बार की चुनाव में लालू अंदाज को लोग जरूर मिस कर रहे हैं. लालू प्रसाद को सुनने वैसे लोग भी खूब आते थे जो लालू प्रसाद को वोट नहीं देते थे. मगर लालू प्रसाद के भाषण का लुत्फ लेना नहीं भूलते थे.

बीजेपी के सहयोग से बने थे सीएम

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बिहार बीजेपी के नेता और डिप्टी सीएम सुशील मोदी आज भले ही लालू प्रसाद (Lalu prasad) के सियासी दुश्मन बने बैठे हैं, मगर 1990 में जब पहली बार लालू प्रसाद सीएम बने थे तो बीजेपी सहित पूरा विपक्ष ने उनका समर्थन किया था. यानी बीजेपी के समर्थन से ही लालू प्रसाद पहली बार सीएम बने थे. राम मंदिर आंदोलन के दौरान आडवाणी को गिरफ्तार लालू प्रसाद ने हमेशा के लिए बीजेपी और आरएसएस को अपना दुश्मन बना लिया, जो अब तक जारी है.

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बाद में लालू प्रसाद (Lalu prasad) कांग्रेस से कनेक्ट हो गए और बिहार में 15 साल तक राज किया. बिहार के जातीय गोलबंदी पर राज करने वाले लालू प्रसाद की रणनीति 2005 में फेल हो गई. नीतीश की अगुआई में एनडीए को सत्ता मिली. सामाजिक चेतना वाले वोटर विकास के एजेंडे को अपना चुके थे.

‘जब तक रहेगा समोसे में आलू…’

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2005 में हार के बाद 2010 के चुनाव में लालू लगभग सियासी मैदान के किनारे पर थे. 2014 में मोदी लहर में आरजेडी (Lalu prasad) टिक नहीं पाई. मगर लालू की किस्मत ने पलटा खाया. जिस नीतीश को लालू कहा करते थे कि ‘उनके पेट में दांत है और 76 फीट की अंतरी है’, वो अब लालू के साथ आ गए. 10 साल बाद 2015 में लालू प्रसाद की पार्टी फिर सत्ता में आई. मगर साल भार बाद ही नीतीश फिर से बीजेपी के साथ हो लिए.

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जब लालू (Lalu prasad) का पॉलिटिकल करियर उफान पर था तब हमेशा कहा करते थे ‘जब तक रहेगा समोसे आलू, तब तक बिहार में रहेगा लालू’. समोसे में आलू तो हैं मगर लालू झारखंड में हैं और परिवार में कलह चरम पर. 2019 का चुनाव बिना लालू के फुल ऑन स्पीड में है. लालू प्रसाद के छोटे बेटे तेजस्वी सियासी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. लालू प्रसाद के बातों को लोगों तक पहुंचा रहे हैं.

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