केजरीवाल के धरने से बना नया विपक्षी मोर्चा, परेशान कांग्रेस हुई शांत!

केजरीवाल के धरने से बना नया विपक्षी मोर्चा, परेशान कांग्रेस हुई शांत!

दिल्ली। 2019 से पहले अपना कुनबा बढ़ाने में जुटी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली में सीएम अरविंद केजरीवाल अपने मंत्रियों के साथ धरने पर बैठे हैं। वहीं, केजरीवाल के समर्थन में सभी विपक्षी दल के सीएम भी आ गए है।

लेकिन इस पूरे मसले पर कांग्रेस अभी तक चुप है। कांग्रेस अभी तक स्पष्ट नहीं कर पाई है कि वो केजरीवाल के साथ है या केजरीवाल के विरोध में। वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।

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केजरीवाल के समर्थन में 4 राज्यों के सीएम

दिल्ली में केजरीवाल और एलजी के बीच चल रहे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल के मुख्यमंत्रियों ने रविवार को पीएम से मुलाकात कर उनसे इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा है। ममता बनर्जी ने इसे संवैधानिक संकट बताया है। इन चारों के सीएम ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी बात की है।

लेकिन अभी तक सभी विपक्षी दलों को कांग्रेस अपने साथ लाने की कवायद कर रही थी। लेकिन केजरीवाल के धरने ने कांग्रेस की मुहिम को झटका दिया है। दिल्ली विवाद में अभी तक जो कांग्रेस की भूमिका है वो हैरान करने वाली है।

दरअसल, इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस पसोपेश में है। अगर पार्टी खुलकर केजरीवाल के समर्थन में आ जाती है तो फिर दिल्ली में उसे नुकसान का अंदेशा है। वहीं, अगर पार्टी केजरीवाल की मांग का विरोध करती है तो फिर महागठबंधन की नींव जो रखी जा रही है उसके झटका लग सकता है। ऐसे में कांग्रेस के लिए इस मामले पर चुप्पी ही सबसे बेहतर विकल्प है।

केजरीवाल पर कांग्रेस की चुप्पी

वहीं, कांग्रेस की इस चुप्पी पर अब ममता बनर्जी दबी जुबान से सवाल उठा रही हैं। नीति आयोग की बैठक में पीएम मोदी के सामने दिल्ली का मुद्दा उठाने के बाद एक सवाल के जवाब में ममता ने कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस की राजनीति क्या है ये उनसे ही पूछना चाहिए। म

मता ने कहा कि पुडुचेरी के सीएम ने इसे सुपर पावर का मसला बताया है। मैं उनके इस बयान से सहमत हूं। लेकिन कांग्रेस केजरीवाल के समर्थन में क्यों नहीं खड़ी है, ये वही बता सकते हैं। इसके पीछे कांग्रेस की क्या राजनीति है उससे पूछना चाहिए।

दरअसल, 23 मई को कर्नाटक के सीएम एचडी कुमारस्वामी के शपथग्रहण समारोह में विपक्ष एकता की नई तस्वीर सामने आई थी। मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस समेत तमाम क्षेत्रीय पार्टियां एक मंच पर नजर आई थीं। लेकिन अब जिस तरह से महागठबंधन के घटक दल अपने-अपने फायदे के लिए अलग-अलग रणनीति बना रहे हैं, उससे बीजेपी के खिलाफ एकजुटता की मुहिम को झटका लग रहा है।

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