माल्या, नीरव, चौकसी और संदेसरा को भूल जाइए, अब ‘बाजार’ में 91 हजार करोड़ के साथ IL&FS

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IL&FC पर 91 हजार करोड़ का कर्ज

IL&FC पर 91 हजार करोड़ का कर्ज

दिल्ली। माल्या, नीरव, चौकसी और संदेसरा से बड़ा है IL&FS का कर्ज घोटाला. मोदी सरकार को घेरते हुए कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने यही कहा. कांग्रेस के मुताबिक कंपनी को भारतीयों के पैसे से बेलआउट कर एक विदेशी कंपनी को मदद पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. अगर IL&FS कंपनी दिवालिया हुई तो बाजार में भूचाल आ जाएगा. IL&FS पर 91 हजार करोड़ का कर्ज है, जो माल्या, नीरव, चौकसी और संदेसरा के घोटाले से कई गुना बड़ा है. अगर IL&FS कंपनी डूबी तो आप भी नहीं बच पाएंगे

IL&FS पर 91 हजार करोड़ का कर्ज

इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (IL&FS) कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर, फाइनेंस, ट्रांसपोर्ट और दूसरे कई प्रोजेक्ट पर काम करती है. गड़बड़ियों का पता तब चला जब कंपनी ने कर्ज का ब्याज नहीं चुका पाई. वो भी एक महीने में तीसरी बार ऐसा हुआ. कंपनी को अगले 6 महीने में 3,600 करोड़ रुपए से अधिक कर्ज चुकाने हैं. मगर मुश्किल ये है कि IL&FS पर 91 हजार करोड़ का कर्ज है और उसने जिसे कर्ज दिया है वो लौटा नहीं पा रहे हैं. इसकी वजह से IL&FS ने स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपेंट बैंक ऑफ इंडिया यानी सिडबी के एक हजार करोड़ रुपए के कर्ज का किश्त नहीं चुका पाई. अधर में पड़े प्रोजेक्ट्स की वजह से सरकार के पास 17 हजार करोड़ रुपए बकाया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिडबी ने अपना कर्ज वसूलने के लिए नेशनल लॉ ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया है.

IL&FS के बहाने केंद्र पर आरोप

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि 2017-18 में IL&FS का घाटा 2,395 करोड़ था. उनके मुताबिक IL&FS में 40 फीसदी हिस्सेदारी एलआईसी, एसबीआई और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया जैसी सरकारी संस्थाओं का है. ऐसे में सवाल उठता है कि जिस कंपनी में 40 फीसदी हिस्सेदारी सरकारी कंपनियों का है, उस IL&FS पर 91 हजार करोड़ का कर्ज कैसे चढ़ गया? बताया जाता है कि 91 हजार करोड़ में 67 हजार करोड़ रुपए एनपीए (नहीं मिलनेवाला रकम) हो चुका है. कांग्रेस प्रवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कई एजेंसियों से इस मामले की जांच की मांग की.

नोमुरा रिसर्च की मानें तो IL&FS पर छोटी अवधि का करीब 13,559 करोड़ रुपए का कर्ज है और लंबी अवधि में उसे 65,293 करोड़ रुपए का कर्ज है. इसमें 60 हजार करोड़ रुपए के आसपास का कर्ज सड़क, बिजली और पानी के प्रोजेक्ट से जुड़ा है. नोमुरा इंडिया के मुताबिक IL&FS पर 91 हजार करोड़ का कर्ज है. इसमें IL&FS पर अकेले 35 हजार करोड़ रुपए और IL&FS फाइनेंशियल सर्विसेज पर 17 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है.

IL&FS क्या है, किसने बनाया?

1987 में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया और हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी ने इफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को कर्ज देने के मकसद से एक कंपनी बनाई और इसका नाम दिया गया IL&FS (इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज). IL&FS सरकारी क्षेत्र की कंपनी है और इसकी कई सहायक कंपनियां है. इसे नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी यानी एनपीएफसी का दर्जा हासिल है. 1992-93 में कंपनी ने जापान की ओरिक्स कॉर्पोरेशन के साथ तकनीकी और वित्तीय साझेदारी के लिए करार दिया. IL&FS में 10 फीसदी हिस्सेदारी ओरिक्स की भी है. 1996-97 में दिल्ली-नोएडा टोल ब्रिज बनाकर IL&FS कंपनी सुर्खियों में आई. इसके बाद से कई प्रोजेक्ट पर कंपनी ने काम किया. कई प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहे हैं. मगर फिलहाल IL&FS पर 91 हजार करोड़ का कर्ज है.

IL&FS संकट का पड़नेवाला असर

IL&FS कर्ज संकट की वजह से 1500 छोटी वित्तीय कंपनियों पर बंदी का तलवार लटक रही है. जल्द ही इन कंपनियों के लाइसेंस रद्द हो सकते हैं. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि इन कंपनियों को जिस बड़ी कंपनी (IL&FS) ने लोन दिया है उसकी खुद की हालत खराब हो रही है. इस कंपनी में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने बड़ा निवेश कर रखा है. अगर कंपनी डूबी तो 11,400 एनपीएफसी कंपनियों के लाइसेंस रद्द हो सकते हैं. खुद IL&FS पर 91 हजार करोड़ का कर्ज है. इन कंपनियों के पास इतना भी पैसा नहीं बचा है कि इसे आगे चला सकें. इन 15,00 कंपनियों ने बाजार में 22 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज दे रखा है. कर्ज न चुका पाने की स्थिति और IL&FS के कर्ज संकट से इन कंपनियों की हालत खराब हो गई है.

एनबीएफसी कंपनियां क्या होती है?

एनबीएफसी कंपनियों से वो लोग लोन लेते हैं, जिन्हें किसी वजह से बैंक से लोन नहीं मिल पाता है. इन कंपनियों पर बैंकों जैसे नियम लागू नहीं होते हैं और लोन लेना आसान होता है. IL&FS भी एक एनबीएफसी कंपनी है जो बड़े प्रोजेक्ट को लोन देती थी. इसकी क्रेडिट रेटिंग भी काफी अच्छी थी. मगर पिछले कुछ दिनों में इसकी साख गिर गई. एक हफ्ते में इसकी रेटिंग ‘एए प्लस’ से गिरकर ‘जंक स्टेटस’ यानी कूड़ा करकट हो गया.

कंपनी ने सबसे ज्यादा 10,198 करोड़ का कर्ज डिबेंचर्स के रुप में लिया है और इनमें बड़ा हिस्सा जीआईसी, पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस, नेशनल पेंशन स्कीम ट्र्स्ट, एलआईसी, एसपीआई इम्प्लाइज पेंशन फंड के अलावा कई नामी म्यूचुअल फंड्स का है. सवाल ये है कि क्या IL&FS में चल रहे संकट का असर ईपीएफ पर भी पड़ेगा?. फिलहाल IL&FS पर 91 हजार करोड़ का कर्ज है और वो उससे उबरने की कोशिश में हाथ-पांव मार रही है.