योगी का ‘वो’ भाषण जिसने कैराना में बीजेपी को हरा दिया!

योगी का 'वो' भाषण जिसने कैराना में बीजेपी को हरा दिया!

दिल्ली। गोरखपुर और फूलपुर में मिली करारी हार के बाद बीजेपी को कैराना व नूरपुर में भी 2019 से पहले जबर्दस्त हार हुई है। उसके बाद से चर्चाओं और मंथन का दौर जारी है। साथ ही कई सवाल भी उठ रहे हैं कि कैराना में बीजेपी की हार के पीछे की असली वजह क्या है। उन्हीं चर्चाओं के बीच उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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‘भाषणबाजी’ की आदत से मिली हार?

बताया जा रहा है कि कैराना में योगी का एक भाषण वहां भाजपा को ले डूबा। कैराना में भाजपा की जीत के लिए जाट वोट सबसे महत्वपूर्ण था। जाटों ने पिछले लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में भाजपा को वोट देकर इसे साबित भी किया था।

लेकिन जब उपचुनाव में प्रचार करने योगी कैराना पहुंचे तो वहां उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया कि जिससे जाट वोट भाजपा के खिलाफ हो गया।

दरअसल, आरएलडी के जाट नेता अजीत सिंह ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक रखी थी क्योंकि यह उनके लिए वर्चस्व की लड़ाई बन गया था। इस चुनाव में सभी विपक्षी दलों का समर्थन लेकर आरएलडी ने ही अपना प्रत्याशी दिया था।

लेकिन जाट असमंजस में थे कि वो अजीत सिंह का साथ दें या भाजपा के साथ बने रहें। भाजपा ने मुजफ्फरनगर दंगों में जाटों के खिलाफ मामले वापस लेने का तुरुप भी खेला। इससे जाटों में मुसलमानों के खिलाफ वोट देने और भाजपा के साथ खड़े होने की गुंजाइश भी बनती नजर आई।

काश शामली में ‘वो बात’ नहीं कही होती

लेकिन शामली में अपनी आखिरी रैली को संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ वो गलती कर गए जिसकी कीमत भाजपा को हारकर चुकानी पड़ी।

योगी ने इस रैली को संबोधित करते हुए कहा कि बाप-बेटा आज वोटों के लिए गली-गली भीख मांग रहे हैं। यही बात जाटों को चुभ गई। उन्हें लगा कि एक गैर-जाट के मुंह से जाटों के एक नेता के बारे में ऐसे शब्द बिरदारी के लोगों को कतई पसंद नहीं आए।

उन्हें लगा कि बाहर का एक आदमी उनके घर में उनके अपने भाई और बेटे का इतना अपमान करके कैसे जा सकता है। हमेशा ही जाट बिरदारी अपनी भावुकता और तेवर के लिए जानी जाती है।

योगी की बात कई लोगों को चुभ गई। यह बात अगर कोई जाट नेता भाजपा की ओर से कहता तो शायद जाटों को इतना बुरा नहीं लगता।

रातोंरात लामबंद हुए कैराना के जाट

लेकिन योगी का ऐसा कहना रातोरात आग की तरह जाटों के बीच फैला और जाट उन्हें सबक सिखाने के लिए लामबंद हो गए। उसके बाद घर-घर जाकर अजीत सिंह और उनके बेटे जयंत सिंह ने तबस्सुम के लिए वोट मांगे थे।

उन्होंने जाटों को बार-बार याद दिलाया कि यह बिरदारी की अस्मिता और सम्मान का प्रश्न है। अजीस सिंह की इन बातों के प्रति योगी के बयान ने आग में घी का काम किया और नतीजा यह हुआ की बीजेपी हार गई।

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