देश का सबसे लंबा डबल डेकर ब्रिज तैयार, PM मोदी आज करेंगे उद्घाटन

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double decor bridge

देश का सबसे लंबा डबल डेकर ब्रिज तैयार, PM मोदी आज करेंगे उद्घाटन

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन के मौके पर देश को मिलेगी बेहतरीन सौगात। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज देश के सबसे लंबे डबल डेकर ब्रिज (double decor bridge) का उद्घाटन करने वाले हैं। इसे न्यू इंडिया का ब्रिज भी कहा जा रहा है।

न्यू इंडिया का ‘बोगीबील’ ब्रिज

भारत का सबसे लंबा डबल डेकर ब्रिज (double decor bridge) असम में डिब्रूगढ़ को धेमाजी से जोड़ेगा। इंजीनियरिंग का ये बेमिसाल नमूना अरुणाचल को असम के और नजदीक ले आएगा।

ये ब्रिज 4.94 किलोमीटर लंबा है और भूकंपरोधी भी। सरहद पर सेना के लिए ये किसी लाइफलाइन से कम नहीं।

सदियों पुराना ख्वाब जब 21 साल के लंबे सफर के बाद संवर कर सामने आता है…तो यूं ही रंगीन होता है। बोगीबील ब्रिज भी उसी ख्वाब की एक ताबीर है।

इसकी नींव का पत्थर 21 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने रखी थी। फिर इसके निर्माण का आदेश 16 साल पहले पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने दिया।

डबल डेकर ब्रिज की खासियत

डिब्रूगढ़ और धेमाजी को रेल और सड़क दोनों नेटवर्क से जोड़ने के लिए बना डबल डेकर बोगीबील ब्रिज (double decor bridge) ना केवल सामरिक रूप से अहम है बल्कि ये इंजीनियरिंग का भी बेजोड़ नमूना है।

इसकी खासियतों पर नज़र डालें तो 4.94 किलोमीटर लंबे इस ब्रिज के नीचे की लेन में ब्रॉड गेज की 2 रेलवे ट्रैक हैं। ब्रिज में ऊपर की लेन में 3 लेन की सड़क बनाई गई है।

इतना ही नहीं, ब्रिज पर 100 किलोमीटर की रफ्तार से ट्रेन दौड़ सकती है। ये ब्रिज ब्रह्मपुत्र के जलस्तर से 32 मीटर की ऊंचाई पर है। ब्रह्मपुत्र नदी पर बना ये पुल महज 42 पिलर्स पर टिका है।

करीब 62 मीटर गहराई में पिलर्स की नींव रखी गई है। डबल डी वेल फाउंडेशन के पिलर भयावह बाढ़ झेल सकते हैं। और तो और ये ब्रिज 8 तीव्रता का भूकंप भी झेल सकता है।

यूरोपीय मानकों के आधार पर बने बोगीबील ब्रिज (double decor bridge) में जंगरोधी सामान लगे हैं। ये भारत का पहला ऐसा पुल है जो पूरी तरह से वेल्डिंग किया हुआ है। इसकी लाइफ 120 सालों से ज्यादा बताई जा रही है। बोगीबील ब्रिज को बनाने में करीब 5800 करोड़ का खर्च आया है।

भारतीय सेना की ‘लाइफलाइन’

और आइये अब आपको बताते हैं कि इस पुल से आम लोगों और भारतीय सेना को कैसे फायदा पहुंचेगा। इससे असम-अरुणाचल के 50 लाख लोगों को सफर में सहूलियत होगी।

ये ब्रिज उत्तरी तट पर धेमाजी और दक्षिणी तट पर डिब्रूगढ़ ब्रिज से जुड़ेगा। डिब्रूगढ़ की रेलवे लाइन अब अरुणाचल के नाहरलगुन से जुड़ेगी।

नाहरलगुन से अरुणाचल की राजधानी ईटानगर महज 15 किमी है, ऐसे में पूर्वी असम से अरुणाचल प्रदेश की दूरी घटकर 4 घंटे की रह जाएगी। दिल्ली से डिब्रूगढ़ की रेल यात्रा 3 घंटे घट कर 34 घंटे की रह जाएगी।

अरुणाचल में भारत-चीन बॉर्डर पर आर्मी मूवमेंट और सप्लाई तेज होगी। साथ ही इस ब्रिज से टैंक से लेकर 1700 मेगाटन तक का सामान लाया- ले जाया जा सकेगा।

फर्राटे भरेगा विकास

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स्वीडन और डेनमार्क की तर्ज पर इस पुल (double decor bridge) को तैयार किया गय है। इसकी मदद से सेना सरहद पर चीन की किसी भी चालबाजी से निबटने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएगी।

साथ ही साथ इस पुल के चालू होने के बाद ना केवल पूर्वोत्तर का विकास फर्राटे भरेगा बल्कि ब्रह्मपुत्र के दोनों किनारों पर रहनेवाले लोगों के रिश्ते भी मजबूत होंगे।

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