क्या चाहते हैं श्री अयप्पा स्वामी ? महिलाओं पर पाबंदी को लेकर SC में वकील की दलील

क्या चाहते हैं श्री अयप्पा स्वामी ?

जब आप धर्म की बात करते हैं तो मन में भगवान की एक छवि बनती है। वो छवि जो कण-कण में बसते हैं। वो छवि जिसपर सभी का समान अधिकार है। वो छवि जो सर्व विद्यमान है। लेकिन हैरत तब होती है जब उसी भगवान के पास जाने में उसके दर्शन करने में पाबंदी लगा दी जाए और वो भी लिंगभेद के आधार पर। देश में ऐसे कई मंदिर है जहां पुरूषों के जाने पर पाबंदी है तो कुछ ऐसे भी मंदिर हैं जिस मंदिर में महिलाओं का जाना वर्जित है। आखिर क्या चाहते हैं श्री अयप्पा स्वामी ?

मंदिर में महिलाओं का जाना वर्जित

देश में दो ऐसे मंदिर हैं जहां आज भी महिलाएं भगवान के दर्शन से वंचित हैं। एक है महाराष्ट्र का शनि शिंगणापुर मंदिर। हालांकि 2016 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी तो हटा ली गई लेकिन आज भी वहां महिलाओं को गर्भगृह में जाने की इज़ाजत अघोषित तौर पर नहीं है।

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दूसरा मंदिर है केरल के सबरीमाला पर्वत स्थित श्री अयप्पा स्वामी का मंदिर। यहां भी महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। हालांकि इसपर काफी दिनों से विवाद चल रहा है कि सबरीमाला मंदिर में एक खास उम्र की महिलाओं का मंदिर में प्रवेश का अधिकार मिलना चाहिए या नहीं ?

क्या चाहते हैं श्री अयप्पा स्वामी ?

मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की इज़ाजत क्यों नहीं मिले, इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज वकील साईं दीपक ने श्री अयप्पा स्वामी का पक्ष कोर्ट के सामने रखा। इस दौरान उन्होंने ये तर्क दिया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अयप्पा स्वामी को नैष्ठिका ब्रह्मचारी रहने का अधिकार प्राप्त है इसलिए महिलाओं का मंदिर में प्रवेश सीमित रहना चाहिए।

इसके लिए वकील ने ये भी दलील दी कि स तरह पुरुषों और महिलाओं के साथ साथ अन्य सामाजिक और धार्मिक संस्थान को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है। ठीक उसी तरह अयप्पा स्वामी को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है…क्योंकि वो उस मंदिर के देव हैं। कोर्ट को भी वकील की दलील इतनी पसंद आई कि पांच जजों की खंडपीठ ने लंच से पहले के 10 मिनट के वक्त को लंच के बाद तक के लिए एक्सटेंड कर दिया। खास तौर पर सीजेआई ने इसकी सराहना भी की।

क्या चाहते हैं श्री अयप्पा स्वामी ?

किस बात पर है विवाद ?

दरअसल, सबरीमाला पर्वत पर ही श्री अयप्पा स्वामी का मंदिर है जहां हर साल 41 दिनों की खास पूजा के बाद सिर्फ पुरुष ही अयप्पा स्वामी के दर्शन के लिए जाते हैं। इस मंदिर में 10 साल से लेकर 50 साल तक की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। इस नियम का पालन लम्बे समय से महिलाएं करती भी आ रही हैं लेकिन सवाल ये है कि क्या ये भेदभाव भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 यानी समानता के अधिकार की अवहेलना है या नहीं ? न्यायालय का भी यही मानना है की मंदिर सभी वर्ग के लोगों के लिए है और इसमें प्रवेश का अधिकार सभी को है.

कौन हैं श्री अयप्पा स्वामी ?

अयप्पा स्वामी हिन्दू धर्म के देवता हैं। मान्यता है कि अयप्पा, भगवान शिव और भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार के पुत्र थे। इसलिए इन्हें हरिहर पुत्र भी कहा जाता है। वहीं, पुराणों के लिहाज से अयप्पा शास्ता के अवतार हैं।

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धार्मिक कथा के मुताबिक समुद्र मंथन के दौरान भोलेनाथ भगवान विष्णु के मोहिनी रुप पर मोहित हो गए थे और इसी के प्रभाव से एक बच्चे का जन्म हुआ जिसे उन्होंने पंपा नदी के तट पर छोड़ दिया। इस दौरान राजा राजशेखरा ने उन्हें 12 सालों तक पाला। बाद में अपनी माता के लिए शेरनी का दूध लाने जंगल गए अयप्पा ने राक्षसी महिषि का भी वध किया।

केरल में सबरीमाला पर्वत स्थित श्री अयप्पा स्वामी मंदिर में विश्व भर से लोग दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर के पास मकर संक्रांति की रात घने अंधेरे में रह-रहकर एक ज्योति दिखती है। माना जाता है कि इस ज्योति के दर्शन कर श्रद्धालु सीधे भगवान श्री अयप्पा स्वामी का आशीर्वाद ले लेते हैं। अब क्या चाहते हैं श्री अयप्पा स्वामी ? इसे लेकर सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिक गई हैं।

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