81 मंत्रियों के संग अटल जी ने चलाई थी सरकार, परमाणु परीक्षण कर हिला दिया था दुनिया

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परमाणु परीक्षण कर हिला दिया था दुनिया

81 मंत्रियों के संग अटल जी ने चलाई थी सरकार, परमाणु परीक्षण कर हिला दिया था दुनिया

दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 93 साल की उम्र में एम्स में भर्ती हैं और पूरे देश में उन्हें स्वस्थ्य होने की कामना की जा रही है। अटल जी सिर्फ भारतीय राजनेता ही नहीं थे, बल्कि वे एक साहित्यकार, कवि, पत्रकार और कुशल वक्ता भी रहे और उनकी भाषण शैली के विरोधी भी प्रशंसक थे। उनके जीवन में कई ऐसी घटनाएं रही हैं, जो उन्हें एक राजनेता के अलावा एक महान शख्सियत बनाती हैं।

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जेल भी गए थे अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी सिर्फ एक राजनेता ही नहीं हैं, बल्कि उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी अहम भूमिका भी निभाई थी। वे पढ़ाई बीच में ही छोड़कर पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय हो गए। साल 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उन्हें 23 दिन के लिए जेल भी जाना पड़ा था।

दरअसल, साल 1955 में पहली बार उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा मगर वो हार गए। इसके बाद साल 1957 में उन्होंने बलरामपुर, लखनऊ और मथुरा से चुनाव लड़ा और लखनऊ और मथुरा से तो वो हार गए लेकिन बलरामपुर से उन्हें जीत हासिल हुई। उसके बाद वे तीन बार देश के प्रधानमंत्री भी रहे।

साल 1977 में जब देश में मोरारजी देसाई की सरकार थी तो अटल जी दो साल तक देश के पहले गैर-कांग्रेस विदेश मंत्री बने। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देकर पूरे देश को गर्व करने का मौका दिया।

…जब सिर्फ 13 दिन चली थी सरकार

वे कई बार देश के प्रधानमंत्री बने और एक बार 13 दिन में ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। उसके बाद साल 1998-2004 तक अटल जी देश के पीएम रहे। इस दौरान उन्होंने 24 दलों के गठबंधन से बनी सरकार का कुशलतापूर्वक नेतृत्व किया। इस सरकार में कुल 81 मंत्री थे।

वहीं, जब अमेरिका जैसा देश भारत का विरोध कर रहा था, ऐसे में बिना हिचक के अटल जी ने बेहद साहसिक कदम उठाया। यह कदम था साल 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण करवाना। यह परीक्षण करवाकर उन्होंने दुनिया को बता दिया कि भारत अब किसी से डरने वाला नहीं है। अटल बिहारी वाजपेयी जितने मशहूर राजनेता रहे हैं, उतने ही मशहूर कवि और साहित्यकार के तौर पर भी है।

इंदिरा गांधी को कहा था ‘दुर्गा’

1971 में अटल बिहारी वाजपेयी विपक्ष के नेता थे और इंदिरा गांधी की प्रधानमंत्री थीं। उस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने विपक्ष के नेता के तौर पर एक कदम आगे जाते हुए पूर्व पीएम इंदिरा गांधी को दुर्गा करार दिया। वाजपेयी ने यह शब्द इंदिरा के लिए उस समय प्रयोग किए जब भारत को पाकिस्तान पर 1971 की लड़ाई में एक बड़ी कामयाबी हासिल की थी।