क्यों छलकी ‘दीदी’ की ‘ममता’ ? पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के लिए भेजी राखी

हार्दिक पटेल को राखी भेजी

भइया मेरे राखी के बंधन को निभाना….। बहना ने भाई की कलाई पर प्यार बांधा है…। ये बंधन तो प्यार बंधन का है…। जी हां ये तमाम फिल्मी गाने अब सियासी लगने लगे हैं, क्योंकि दीदी की ‘ममता’ हार्दिक पटेल को लेकर छलक उठी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रक्षाबंधन के मौके पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को राखी भेजी है।

हार्दिक पटेल को राखी भेजी

टीएमसी नेता और पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर राखी लेकर आज अहमदाबाद पहुंचे और हार्दिक पटेल को राखी बांधी।

आरक्षण और किसानों की कर्ज माफी की मांग को लेकर शनिवार से हार्दिक पटेल अपने घर पर ही अनशन पर बैठे हैं। यही वजह है कि टीएमसी नेता सीधे हार्दिक के घर पहुंचे और खुद उन्हें राखी बांधी और साथ ही उनके आंदोलन में टीएमसी का समर्थन भी जताया।

हार्दिक पटेल को राखी भेजी

दीदी की ‘ममता’ का सियासी फार्मूला

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ऐसा नहीं है कि ममता बनर्जी का ये बहन-भाई का प्यार रक्षाबंधन को लेकर जागा है। ममता के लिए हार्दिक पटेल का मोटा भाई बनना दरअसल मोदी विरोधी खेमे को तरजीह देने जैसा ही है। मिशन 2019 को लेकर राजनीतिक माहौल बदलना चाहती हैं ममता बनर्जी और इसके लिए हार्दिक पटेल तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं। हार्दिक इससे पहले भी पाटीदार आंदोलन के जरिए खुद को मोदी विरोधी चेहरा साबित कर चुके हैं और काफी लोकप्रियता भी हासिल की है।

हार्दिक पटेल को राखी भेजी

दीदी से फोन पर लिया गुरुमंत्र

इतना ही नहीं, हार्दिक पटेल ने अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने से पहले ममता दीदी से फोन पर बातचीत भी की। तकरीबन 20 मिनट तक चली इस बातचीत में देश की सियासत का हर पहलू खंगाला गया। सूत्रों के मुताबिक दीदी ने हार्दिक को आंदोलन की पूरी स्ट्रैटेजी समझाई है। हार्दिक भी ममता बनर्जी से गुरुमंत्र लेकर अपना आंदोलन शुरू कर चुके हैं और चाहते हैं कि ममता बनर्जी भी उनके आंदोलन मंच पर जल्द ही अपनी मौजूदगी दर्ज कराएं।

‘इंदिरा’ की जगह ममता

हार्दिक लगातार ममता बनर्जी के संपर्क में हैं। हाल ही में हार्दिक पटेल कोलकाता भी गए थे जब उन्होंने आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सीएम ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। गुजरात चुनाव के दौरान भी जब हार्दिक ने खुद चुनाव लड़ने की बजाए कांग्रेस को समर्थन दिया था। तब हार्दिक ने ये तक कहा था कि “इंदिरा गांधी के बाद ममता बनर्जी ही हैं जो देश का नेतृत्व कर सकती हैं।”

अहमदाबाद में ब्रिटिश शासन लागू

25 अगस्त को पाटीदार क्रांति दिवस के तौर पर मनाया जाता है, इस वजह से भी हार्दिक ने अनशन की शुरुआत के लिए ये दिन चुना था। हालांकि प्रशासन ने उन्हें सत्याग्रह छावनी एरिया में भूख हड़ताल की इजाज़त नहीं दी जिसके बाद वो अपने घर पर ही अनशन पर बैठ गए हैं।

हार्दिक के अनशन शुरू करते ही उनके निवास और उसके आस-पास बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है…मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तो उस पूरे इलाके में धारा 144 लगा दी गई है और हर आने जानेवालों की सघन तलाशी ली जा रही है।

ऐसे में ममता दीदी की राखी लेकर पहुंचे दिनेश त्रिवेदी ने कहा है कि “पुलिस की भारी तैनाती देख ऐसा महसूस हो रहा है कि पूरे अहमदाबाद में ब्रिटिश शासन लागू है।”

जेल भी जा सकते हैं हार्दिक

सोमवार को दंगे के एक केस में सिटी सेशन्स कोर्ट सरकार की उस अपील पर फैसला सुना सकती है जिसमें हार्दिक की बेल रिजेक्ट करने की मांग की गई है। दरअसल, तीन साल पहले 25 अगस्त को ही पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान काफी उपद्रव और हिंसा हुई थी जिसमें सार्वजनिक संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचाया गया था और 14 लोगों की मौत ई थी।

इसके जवाब में हार्दिक ने कहा है कि बेल कैंसिल होने पर भी वो जेल से अपनी भूख हड़ताल जारी रखेंगे।

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