8 मुद्दों पर जेडीयू-बीजेपी में आर-पार, क्या नीतीश छोड़ेंगे मोदी का साथ?

8 मुद्दों पर जेडीयू-बीजेपी में आर-पार, क्या नीतीश छोड़ेंगे मोदी का साथ?

दिल्ली। कहा जाता है कि असली राजनेता वही होता है तो उठते-बैठते, खाते-पीते, सोते-जागते, देखते-सुनते, घूमते-फिरते, सुनते-बोलते यहां तक की मुस्कुराते हुए भी राजनीति के बारे में सोचे. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसके माहिर खिलाड़ी है. आजकल बीजेपी के चाणक्य कहे जानेवाले अमित शाह की स्ट्रेटजी पर भारी पड़ रहे हैं.

8 मुद्दों पर जेडीयू-बीजेपी आमने-सामने

2019 चुनाव से पहले सियासी दांव-पेंच की खेल जारी है. एक ओर विपक्ष महागठबंधन की गांठ को मजूबत करने में जुटा है तो एनडीए में सीटों को लेकर खींचतान सुर्खियां बटोर रही है. बिहार में जेडीयू आंखें तरेर रही है. बीजेपी बैकफुट पर है. जेडीयू के प्रवक्ता पहले ही कह चुके हैं कि वो बिहार में बड़े भाई और चेहरा पर कोई समझौता नहीं करेंगे. कम से कम लोकसभा की 25 सीटें तो मिलनी ही चाहिए. हालांकि अच्छी बात ये रही इस मसले पर प्रदेश के बड़े नेता संयम बरता. मगर बिहार एनडीए में विवाद सिर्फ सीटों को लेकर ही नहीं बल्कि कई मुद्दों पर भी दोनों में पार्टियां खुलकर आमने-सामने हैं.

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1. नोटबंदी

जब नीतीश कुमार महागठबंधन में थे तो मोदी सरकार के नोटबंदी पर लिए फैसले का जबर्दस्त स्वागत किया था. उन्होंने फैसले को सही ठहराया था. मगर जब महागठबंधन तोड़ कर एनडीए के साथ आए और सीएम पद शपथ ली तो कुछ ही दिनों बाद नोटबंदी के फैसले पर सवाल उठा दिए. एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि बैंकों की भूमिका के कारण नोटबंदी का लाभ जितना लोगों को मिलना चाहिए था उतना नहीं मिल पाया. इसके बाद पार्टी के दूसरे छोटे नेता भी नोटबंदी के खिलाफ खुलकर बोलने लगे. इसकी वजह से बिहार बीजेपी की किरकिरी हुई.

2. विशेष दर्जा

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग नीतीश काफी लंबे समय से करते आए हैं. लेकिन जैसे की आंध्र प्रदेश ने स्पेशल स्टेटस के मुद्दे पर तेवर टाइट किए नीतीश कुमार भी ऐक्टिव हो गए. पहले पुरानी चिट्ठी को अपने ट्विटर हैंडल पर डाले फिर प्रवक्ताओं ने मोर्चा संभाल लिया. इसके बाद उन्होंने नीति आयोग की बैठक में एक फिर से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने का मामला उठाया.

3. मिड डे मील

जिस मिड डे मील को लेकर तमाम गड़बड़ियों के बीच बच्चों का सेहद सुधारने वाला बताया गया है, उसी की नीतीश कुमार ने नीति आयोग की बैठक में आलोचना की. उन्होंने कहा कि मिड डे मील स्कीम से स्कूल अब भोजशाला में तब्दील हो गया है. लिहाजा ये बेहतर होगा कि पोषाहार के लिए बच्चों को राशि उपलब्ध कराई जाए, ताकि विद्यालयों में पढ़ने का माहौल बन सके.

4. गंगा

गंगा सफाई प्रधानमंत्री की ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक है. इसके लिए बड़ा बजट भी उन्होंने एलॉट किया. मगर अब तक कोई खास बड़ा रिजल्ट देखने को नहीं मिला. प्रधानमंत्री की इस ड्रीम प्रोजेक्ट की नीतीश कुमार अक्सर आलोचना करते हैं. नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार की नमामि गंगे परियोजना को फेल करार दिया. उन्होंने कहा कि गंगा की न तो निर्मलता बची है और न ही अविरलता. नीतीश कुमार ने ये भी कहा कि केंद्र की सरकार गलत आंकड़े पेश कर रही है. इस समय गंगा का काम नितिन गडकरी संभाल रहे हैं. इसे गडकरी पर नीतीश कुमार पलटवार समझा गया था.

5. सड़क

हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि बिहार में उनके करीब 2 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट फंसे हुए हैं. इसमें राज्य सरकार की लापरवाही है. जिस पर नीतीश सरकार की ओर से प्रेस रिलीज जारी कर पलटवार किया गया था. बिहार पथ निर्माण विभाग की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया था कि बिहार में सिर्फ 54 हजार 700 करोड़ रुपए की ही रोड प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. इस परियोजना की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2015 के चुनाव के दौरान विशेष पैकेज के तौर पर की थी.

6. फसल बीमा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की तारीफ करती है. लेकिन बिहार की सरकार ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. नीतीश सरकार की ओर से कहा गया कि फसल बीमा योजना का लाभ किसानों को उतना भी नहीं मिल पाता है, जितना बीमा कंपनियों को राज्य और केंद्र सरकार से प्रीमियम के रुप में मिलता है. केंद्र की इस योजना को खारिज करते हुए नीतीश सरकार ने राज्य स्तर पर अपनी बीमा योजना लॉन्च की.

7. क्राइम-करप्शन-कम्युनलिज्म

रामनवमी के बाद बिहार में जिस तरह साम्प्रदायिक घटनाएं हुई थी और नीतीश कुमार विपक्ष के निशाने पर आए थे उसके बाद उन्होंने अपनी मन की बात कही. बाद में नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी सरकार ‘थ्री सी’ के फॉर्मूले पर चल रही है. उन्होंने कहा कि काम करते जाइए, काम की प्रतिबद्धता है और हम काम करते रहेंगे. हम कभी भी क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म से समझौता नहीं करेंगे. साफ है कि इसके जरिए नीतीश बीजेपी को संदेश देना चाहते थे. जोकीहाट-अररिया चुनाव में जिस तरह से साम्प्रदायिकता का मुद्दा उठा था उसी पर ये नीतीश का मैसेज था.

8. बिहार में बड़ा भाई कौन?

बिहार जेडीयू ने प्रदेश में 25 लोकसभा सीटों पर दावा ठोका है. मगर बीजेपी ने पलटवार किया है. प्रदेश बीजेपी के महासचिव राजेंद्र सिंह ने कहा कि पार्टी उन सभी 22 सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारेगी, जहां के उसके सीटिंग सांसद हैं. हालांकि सुशील कुमार मोदी ने कहा था कि नीतीश ही बिहार में बड़ा चेहरा होंगे. मगर चेहरा और सीट को लेकर आजतक बयानबाजी हो रही है.

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