कांग्रेस की प्रियंका पॉलिटिक्स! जानें, कितना कारगर होगा राहुल का ट्रंप कार्ड?

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कांग्रेस की प्रियंका पॉलिटिक्स! जानें, कितना कारगर होगा राहुल का ट्रंप कार्ड?

राहुल गांधी के मास्टर स्ट्रोक ने कांग्रेस संगठन में नई जान फूंक दी है। प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) को कांग्रेस महासचिव बनाने के साथ ही पूर्वी यूपी की जिम्मेदारी दी गई है। जाहिर है उत्तर प्रदेश के मजबूत दुर्ग पर काबिज होने के लिए कांग्रेस ने ये कदम उठाया है।

हालांकि सवाल ये है कि क्या प्रियंका सीएम योगी और पीएम मोदी के गढ़ में कांग्रेस को फिर से अपने पांव पर खड़ा कर पाएंगी? क्या मिशन-19 के लिए राहुल (Rahul Gandhi) का सियासी दांव सटीक बैठेगा। क्या कांग्रेस के ट्रंप का इक्का कारगर साबित होगा?

कांग्रेस की प्रियंका पॉलिटिक्स!

पीएम मोदी के गढ़ में प्रियंका (Priyanka Gandhi) की चुनौती अमेठी और रायबरेली की सीमा के आगे शुरू होगी। दिल्ली की कुर्सी के लिए अहम यूपी में कांग्रेस ने अपने दो युवा सेनापति तैनात किए हैं।

प्रियंका गांधी को पूर्वी यूपी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, मध्य प्रदेश में कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने वाले कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिम यूपी की जिम्मेदारी दी गई है।

एसपी और बीएसपी के गठबंधन के बाद यूपी में अकेली पड़ी कांग्रेस के लिए प्रियंका को जिम्मेदारी देना बड़ा चुनावी दांव माना जा रहा है। हालांकि जब कांग्रेस ने ये मास्टर स्ट्रोक चला तो बीजेपी ने भी परिवारवाद की दुहाई देने में देरी नहीं की।

करीब दो दशक से अमेठी और रायबरेली सीट पर चुनाव प्रचार की कमान प्रियंका ही संभाल रही थीं। लेकिन प्रियंका गांधी की सक्रिय राजनीति में एंट्री बीजेपी समेत बाकी पार्टियों के लिए जोर का झटका हो सकता है। वहीं, प्रियंका की एंट्री से कांग्रेस संगठन में जबरदस्त जोश है।

प्रियंका को क्यों मिली जिम्मेदारी?

आपको बताते हैं कि आखिर कांग्रेस में प्रियंका को मिली जिम्मेदारी क्यों अहम है। किन मायनों में राहुल का ट्रंप कार्ड कारगर साबित हो सकता है? दरअसल, पूर्वी यूपी में करीब 28 जिले हैं। इस इलाके में लोकसभा की 34 सीटें और विधानसभा की 170 सीटें आती हैं।

2014 के लोकसभा चुनाव में पूर्वी यूपी की लगभग सभी सीटों पर बीजेपी को जीत हासिल हुई थी। ऐसे में सिर्फ अमेठी और रायबरेली सीट पर सिमटी कांग्रेस को मेकओवर की जरूरत थी। लिहाजा, प्रियंका की एंट्री कांग्रेस के लिए यूपी में संजीवनी का काम कर सकती है।

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दरअसल, पीएम मोदी से लेकर बीजेपी के कई कद्दावर नेता भी पूर्वी यूपी से ही आते हैं। वहीं, पूर्वी यूपी में आने वाली फूलपुर सीट से पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू सांसद थे तो इलाहाबाद, प्रतापगढ़, वाराणसी, मिर्जापुर समेत कई जिलों में कांग्रेस का खासा प्रभाव रहा है। प्रियंका को कमान मिलने नेहरू के इन इलाकों में फिर से कांग्रेस की ताकत बढ़ सकती है। यानी राहुल का प्रियंका वाला दांव कारगर साबित हो सकता है।

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